नई दिल्ली, केंद्र सरकार की ओर से उर्वरक नीति में एक और बड़ा बदलाव किया गया है। किसानों के लिए सबसे ज्यादा इस्तेमाल होने वाला उर्वरक यूरिया अब और हल्का होने जा रहा है। पहले 50 किलो का यूरिया बैग घटकर 45 किलो किया गया, और अब 2026 से नया यूरिया बैग मात्र 40 किलो का होगा।
सूत्रों के मुताबिक, नए यूरिया बैग में 37 प्रतिशत नाइट्रोजन और 17 प्रतिशत सल्फर की मात्रा मिलेगी। सरकार का दावा है कि सल्फर युक्त यूरिया मिट्टी की उर्वरता बढ़ाने में सहायक होगा और फसलों के लिए अधिक लाभकारी साबित होगा।
हालांकि, किसानों की चिंता इस बात को लेकर है कि वजन घटने के बावजूद कीमत में कोई खास राहत नहीं दी गई है। नए 40 किलो के यूरिया बैग की कीमत 254 रुपये तय की गई है। ऐसे में किसानों का कहना है कि पहले जहां 50 किलो में खाद मिलती थी, अब उसी कीमत के आसपास कम वजन का बैग दिया जा रहा है, जिससे प्रति किलो खाद महंगी पड़ रही है।
किसान संगठनों ने इस फैसले पर सवाल उठाते हुए कहा है कि अगर गुणवत्ता में बदलाव किया जा रहा है तो कीमत में भी उसी अनुपात में कमी होनी चाहिए। उनका आरोप है कि यह फैसला किसानों की लागत बढ़ाने वाला है, जबकि आमदनी पहले से ही संकट में है।
वहीं, सरकार का तर्क है कि सल्फर को शामिल करने से उत्पादन बेहतर होगा और कम मात्रा में भी फसल को पूरा पोषण मिलेगा। अब देखना होगा कि 2026 में लागू होने वाले इस नए यूरिया बैग का असर किसानों की खेती और लागत पर कितना पड़ता है।





