जयपुर की रात आमेर की आबोहवा में घुली भक्ति की सुगंध और ताज आमेर होटल का कुंदनवन लॉन अचानक तिरुपति बालाजी का स्वरूप ले चुका था। शुक्रवार की रात, जब वृंदावन के युवा कथावाचक इंद्रेश उपाध्याय ने यमुनानगर की शिप्रा शर्मा के साथ वैदिक मंत्रों के बीच सात फेरे लिए, तो लगा मानो भगवान वेंकटेश्वर स्वयं इस विवाह को आशीर्वाद दे रहे हों।
देश के कोने-कोने से 101 विद्वान पंडितों ने तीन घंटे तक वेदमंत्रों का उच्चारण किया। हवन की लपटें उठीं, शंखनाद गूंजा और जब दूल्हा-दुल्हन मंडप में आए, तो हर आंख नम और हर चेहरा मुस्कान से भरा था। दुल्हन शिप्रा गोल्डन साड़ी में लाल चुनरी ओढ़े, मानो साक्षात् लक्ष्मी जी अवतरित हो गई हों।
सिर पर मांगटीका, हाथों में चूड़े और नजरें झुकी हुईं। हर कोई बस यही कह रहा था, कितनी सुंदर जोड़ी है और दूल्हा इंद्रेश महाराज शेरवानी में, साफे में, मुस्कान में भक्ति और प्रेम का अनोखा संगम जब उन्होंने शिप्रा का हाथ थामा, तो लगा जैसे राधा-कृष्ण फिर मिल गए हों।
Bride (Shipra Mishra) & Groom (Indresh Upadhyay ji Maharaj) 😍 First Look Together 👩❤️👨🎊#IndreshUpadhyayji #ShipraMishraji #Wedding #Jaipur #Rajashthan #reels #Sangeet #Mahndi #Vrindavan #radhakrishna #devotion #love #spirituality pic.twitter.com/StW4Uj9ei5
— Ankita Rai (@me_ankita_rai) December 4, 2025
पंडित धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री, देवी चित्रलेखा, भागवत भूषण प्रभु, कवि कुमार विश्वास सबने दूल्हा-दुल्हन के सिर पर हाथ रखकर आशीर्वाद दिया। इंद्रेश महाराज, जिनकी कथा में लाखों लोग डूब जाते हैं। आज खुद जीवन की सबसे पवित्र कथा के नायक बन गए..और शिप्रा जो अब उनके जीवन की सहयात्री, उनकी अर्धांगिनी बन गईं। देर रात जब बारात निकली, तो पूरा जयपुर जैसे भक्ति और प्रेम के रंग में रंग गया।




