नयी दिल्ली, देश के सरकारी प्राथमिक विद्यालयों में पहले से कार्यरत शिक्षकों के लिए शिक्षक पात्रता परीक्षा (टीईटी) उत्तीर्ण करने की अनिवार्यता संबंधी एक अदालती आदेश का हवाला देते हुए बृहस्पतिवार को कुछ सांसदों ने सरकार से हस्तक्षेप करने और शिक्षकों का भविष्य सुरक्षित करने का अनुरोध किया।
शिवसेना के सदस्य धैर्यशील माने ने लोकसभा में इस मुद्दे को उठाते हुए कहा कि पहले से सेवारत प्राथमिक शिक्षकों के लिए टीईटी परीक्षा अनिवार्य करने की वजह से उनके भविष्य को लेकर अनिश्चितता की स्थिति बन गई है और सरकार को उनकी ओर से न्यायालय में पक्ष बनना चाहिए।
समाजवादी पार्टी (सपा) के धर्मेंद्र यादव ने भी मुद्दे को उठाते हुए कहा कि इस फैसले से देशभर में 25 लाख और उत्तर प्रदेश में 2 लाख शिक्षक असुरक्षा की भावना से घिर गए हैं।
उन्होंने कहा, ‘‘एक सितंबर, 2025 का उच्चतम न्यायालय का यह फैसला इसलिए आया क्योंकि केंद्र सरकार और राज्य सरकारों ने शिक्षकों की तरफ से कमजोर पैरोकारी की।
सपा के ही लालजी वर्मा ने कहा कि जिस तरह स्नातक और उच्च स्तर पर पहले से अध्यापन करने वाले शिक्षकों के लिए एनईटी परीक्षा उत्तीर्ण करने की बाध्यता नहीं है, उसी तरह पहले से कार्यरत प्राथमिक शिक्षकों को के लिए किसी पात्रता परीक्षा की अनिवार्यता नहीं होनी चाहिए।




