अयोध्या, रुदौली नगरी को सूफी संतों ने अपनी तपस्थली का केंद्र बनाया। उनमें महान सूफी संत हजरत कुतबे आलम शेख मख्दूम अहमद अब्दुल हक साहिबे तोशा चिश्ती साबरी उर्फ मख्दूम साहब काफी प्रसिद्ध है महान सूफी संत का 609 ऐतिहासिक उर्स गुरुवार 4 दिसंबर से शुरू होकर 7 दिसंबर तक चलेगा।
जिसमें देश-विदेश से जायरीन आते हैं और अपनी मनोकामनाएं पूरी करने के लिए बाबा से मिन्नतें करते हैं। मख्दूम साहब का जन्म वर्ष 1356 में हुआ था जिनका खानदानी रिश्ता हजरत उमर फारूक से मिलता है।
हक फाउंडेशन के सदर शाह अमिर तबरेज ने बताया की मख्दूम साहब ने रुदौली को शिक्षा दीक्षा का केंद्र बनाया आपके पुत्र शेख आरिफ और पोते मोहम्मद आरिफ साहब है जिनके शिष्य विश्व प्रसिद्ध संत अब्दुल कुद्दूस गंगोही है।
जिनकी दरगाह सहारनपुर के गंगोह शरीफ कस्बे में स्थित है मखदूम साहब के पीर जलालुद्दीन कबीर उल औलिया है जिनका मजार पानीपत में है। मख्दूम साहब की दरगाह हिंदू मुस्लिम एकता की प्रतीक मानी जाती हैं। मख्दूम साहब की खानकाह में केवल ईश्वरी चर्चा होती है और उनके शिष्यों में विशेष रूप से बख्तियार और मुखालिस शाह साहब थे जो उनके साथ हक़ हक़ कहते हुए चलते थे ।
मख्दूम साहब ने 6 माह तक अयोध्या के पवित्र सरयू नदी में एक पैर से खड़े होकर ईश्वर की तपस्या की और एक बार मखदूम साहब तप में इतना ज्यादा लीन थे कि उनके शरीर का कुछ हिस्सा मछलियों खा गई और उन्हें पता भी नहीं चला इसके बाद मख्दूम साहब को हज़रत अली के द्वारा दुआएं हैदरी मिली बताया जाता है मख्दूम साहब की प्रसिद्धि को देखते हुए सुल्तान इब्राहिम ने रुदौली के आसपास बाबा को चार गांव की एक हजार बीघा जमीन देनी चाहिए जब सुल्तान का काज़ी यह फरमान लेकर बाबा के पास आया तो बाबा ने उसे अस्वीकार किया और कहा कि यदि मैंने इसे ले लिया तो मेरी नस्लें फकीरों की कदर न जानेगी। सन 1411 में बाबा परमब्रह्म में विलीन हो गए।
मख्दूम साहब की मजार मोहल्ला मखदूम जादा में बैंक ऑफ बड़ौदा के पास स्थित है और आपकी बनाई हुई कदीम मस्जिद हज़रत शैख़-उल आलम और खानकाह दरगाह शरीफ से 70 गज की दूरी पर बनी है। बाबा की खानकाह में कव्वाल हिंदी, उर्दू फारसी की कव्वाली का गायन करते हैं। बाबा को अपने पीर हजरत जलालुद्दीन कबीर आलिया से पवित्र वस्त्र और तबर्रुक मिला है जो इस वर्ष 6 दिसंबर 2025 समय 4 बजे को मख्दूम साहब के सज्जादा नशीन शाह मोहम्मद अली आरिफ उर्फ सुब्बू मियां वस्त्र पहन कर जनता को जियारत करवाएंगे।
हक फाउंडेशन के सदर शाह अमिर तबरेज ने बताया की आज 4 दिसंबर को बाद नमाज फजर कुरान खानी और ईद मिलादुन्नबी के बाद उर्स की शुरुआत होगी। दरगाह और खानकाह में रात को कव्वाली होगी मजार शरीफ़ पर अतरपाशी होगी और चादर पेश की जाएगी यह कार्यक्रम सुब्बू मियां की अध्यक्षता में होगा।
5 दिसंबर की शाम को गागर भरी जाएगी मगरिब बाद शेख उल आलम कॉन्फ्रेंस व दस्तारबंदी वा महफ़िल समा कव्वाली का आयोजन किया जाएगा। 6 दिसंबर को 1:30 बजे खानकाह में कव्वाली होगी और शाम को 4 बजे पवित्र वस्त्र खिरका की जियारत कराई जाएगी।
उर्स शुरू होने से पहले एसपी ग्रामीण बलवंत कुमार चौधरी, सीओ रुदौली आशीष निगम, कोतवाल संजय मौर्य सहित प्रशासनिक अधिकारियों ने शाह मोहम्मद अली आरिफ उर्फ सुब्बू मियां से मुलाक़ात की और मेले का स्थलीय निरीक्षण कर ऐतिहासिक मेले को सोल्लास सम्पन्न कराने के लिए अपने मातहतों और एवं पुलिस को आवश्यक दिशा निर्देश दिए।
मेला कमेटी के अध्यक्ष शाह उस्मान अहमद ने बताया कि इस प्रसिद्ध मेले की समस्त तैयारी पूरी कर ली गई है।



