गोंडा जिले में स्वास्थ्य विभाग ने एक निजी अस्पताल में बृहस्पतिवार को दो नवजात शिशुओं की मौत के बाद इस चिकित्सा संस्थान को सील कर दिया। अधिकारियों ने शुक्रवार को यह जानकारी दी।
डॉ. चिश्ती ने बताया कि नर्सिंग स्टाफ ने मोहित को सादे कागज पर ही 54,482 रुपये का बिल थमा दिया, जबकि वह पहले ही लगभग 45,000 रुपये जमा कर चुका था। इतना ही नहीं, बाकी राशि जमा किए बिना नवजात का शव देने से इनकार कर दिया गया।
इसके बाद परिजनों ने पुलिस और प्रशासन को शिकायत दी जिसमें आरोप लगाया गया कि महिला चिकित्सालय में तैनात एक चिकित्सक द्वारा ही इस निजी अस्पताल में नवजात गहन चिकित्सा इकाई (एनआईसीयू) संचालित की जा रही थी और उसी चिकित्सक की देखरेख में बच्चे को भर्ती कराया गया था।
इसी दौरान अस्पताल में भर्ती एक अन्य नवजात की भी मौत की घटना सामने आई।
पुलिस के अनुसार कटरा बाजार क्षेत्र के कोटिया मदारा निवासी विनय सिंह ने बताया कि उनकी पत्नी किरन सिंह का प्रसव 10 सितंबर को सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र कटरा बाजार पर हुआ था, लेकिन नवजात की हालत गंभीर होने पर उसे भी उसी निजी अस्पताल में भर्ती कराया गया था, जहां बृहस्पतिवार शाम करीब छह बजे नवजात ने दम तोड़ दिया।
एक साथ दो नवजातों की मौत के बाद अस्पताल में हंगामा शुरू हो गया जिसके बाद अस्पताल संचालक और चिकित्सक मौके से फरार हो गए।
सूचना पर पहुंची पुलिस और स्वास्थ्य विभाग की टीम ने अन्य मरीजों को सरकारी अस्पताल में भेजा और एनआईसीयू को सील कर दिया।
कोतवाली नगर के प्रभारी निरीक्षक विवेक त्रिवेदी ने बताया कि मोहित और विनय ने थाने में तहरीर देकर उचित कार्रवाई की मांग की है। हालांकि दोनों परिजनों ने नवजातों का पोस्टमार्टम कराने से इनकार कर दिया है। उन्होंने बताया कि मामले की जांच की जा रही है।


