अयोध्या, रूदौली तहसील क्षेत्र के ग्राम पंचायत सिठौली मजरे बाबूरी चक में एक गरीब और असहाय महिला की जिंदगी प्रशासनिक उदासीनता और कुदरत की मार के बीच पिसती नज़र आ रही है।
ग्राम पंचायत सिठौली मजरे बाबूरी चक में रहने वाली बदला देवी के पति रामसुरेश की मृत्यु चार वर्ष पूर्व हो चुकी है। आज खुले आसमान के नीचे जीवन यापन को मजबूर हैं। अभी हाल ही में हुई भारी बारिश के कारण बदला देवी का कच्चा मकान पूरी तरह से ढह गया।
बदला देवी का घर गिरने से उनके पास न तो सिर पर छत बची है न ही रहने और खाने की कोई उचित व्यवस्था है। महिला मजबूरी में अब दूसरे के दरवाजे के सामने चूल्हा जलाकर खाना बना रही हैं और वहीं फर्श पर लेटकर रातें काट रही हैं।
ग्राम प्रधान शिवशरन यादव उर्फ पप्पू ने गरीब महिला की दयनीय स्थिति को देखते हुए हल्का लेखपाल शैलेन्द्र कुमार दूबे को सूचना दी और राहत की अपील की।
लेखपाल का कहना है कि आपदा राहत रिपोर्ट भेज दी गई है आगे की कार्रवाई की जाएगी। लेकिन बड़ा सवाल यह है कि कब’ की जाएगी ,क्या तब, जब यह महिला बीमारी या किसी और अनहोनी का शिकार हो जाए? क्या प्रशासनिक फाइलों के फेर में इंसानियत दम तोड़ देगी तब।
क्या खुले आसमान के नीचे रह रही महिला बदला देवी को तत्काल आवास और जीवन यापन की सुविधा मिल पाएगी?
क्या प्रशासन की जिम्मेदारी सिर्फ रिपोर्ट भेजने तक ही सीमित है? क्या मानवीय संवेदनाएं सिर्फ चुनावी वादों तक सीमित हैं। पीड़ित महिला खुले आसमान के नीचे दूसरे के दरवाजे पर रह रही है।
अब प्रशासन को जरूरत है तुरंत जागने की, क्योंकि हर गुजरता दिन बदला देवी जैसी महिलाओं के लिए एक नई त्रासदी लेकर आता नजर आ रहा है अभी तक महिला को किसी तरह की कोई सहायता उपलब्ध नहीं हो सकी है।


