अयोध्या, नगर निगम क्षेत्र में आवारा कुत्तों की नसबंदी कर कुत्तों के प्रजनन पर विराम लगाने के लिए अभियान चला कर अनुमान के मुताबिक 15 हजार कुत्तों की नसबंदी करने की बात कही जा रही है।
कुत्तों के इस नसबंदी अभियान में अब तक 15 हजार कुत्तों की नसबंदी तो हुई, लेकिन जिन कुत्तों के आतंक को कम होने का दावा नगर निगम कर रहा है उसमें कमी नहीं दिखाई पड़ रही है।
मिली जानकारी के अनुसार कुत्तों को पकड़ कर अस्पताल में लाने और छोड़ने के लिए दो टीमों को लगाया गया है, जिसमें नगर निगम के कर्मचारी शामिल हैं, जबकि नसबंदी के लिए एक चिकित्सक को जिम्मेदारी सौंपी गई है।
नसबंदी के दौरान पहचान के लिए कुत्तों एक कान के ऊपरी हिस्से में छोटा सा कट लगा देते हैं, जिससे टीमों को बगैर नसबंदी वाले कुत्तों को पकड़ने में परेशानी का सामना न करना पड़े। इस अभियान के चलते नगर निगम प्रशासन नसबंदी प्रक्रिया आरंभ होने के बाद से प्रजनन में कमी आने का दावा कर रहा है।
संस्था की ओर से अनुमानित संख्या 15 हजार कुत्तों की नसबंदी कर दिया गया है, इसका भी दावा किया गया है।
मजेदार बात यह है कि आवारा कुत्तों के आतंक का शिकार बच्चे को जिला अस्पताल में एंटी रैबीज का टीका लगाते समय स्वास्थ्य कर्मी ने बताया हकीकत यह है कि कुत्तों के हमले से घायल होने वालों की अस्पतालों में जुटने वाली भीड़ से अंदाजा लगाया जा सकता है कि नगर निगम के दावे में कितनी सच्चाई है।
कुत्तों नसबंदी के लिए नगर निगम द्वारा प्रति कुत्ता 995 रुपये के हिसाब से संस्था को भुगतान कर रहा।
अनुमान के मुताबिक प्रतिदिन तीन सौ से अधिक रैबीज का इंजेक्शन लगवाने के लिए भुक्तभोगी अस्पताल आ रहे हैं, नगर निगम और ठेकेदारों के बीच नसबंदी की जिम्मेदारी संभाल रही संस्था के बीच मार्च 2026 तक के लिए अनुबंध हुआ है। अब तक 15 हजार कुत्तों की नसबंदी की जा चुकी है।
नसबंदी के बाद तीन चार दिन कुत्तों को वापस छोड़ दिया जाता है, नसबंदी वाले कुत्ते की पहचान के लिए उसके बाएं कान के ऊपरी हिस्से में कट लगाया जाता है जिससे चिकित्सक चिह्नित कर सके कि इस कुत्ते की नसबंदी हो चुकी हैं।


