अयोध्या, मोहर्रम का चांद नजर आते ही शहादत और गम का महीना इस्लाम के मानने वाले ग़म में डूब गए।मोहर्रम की पहली तारीख पर मुस्लिम समाज में माहौल गमगीन दिखाई पड़ा।
मोहर्रम को लेकर बीते एक महीने से नगर पालिका रुदौली समेत ग्रामीण क्षेत्र में साफ सफाई शुरू हो गई।शहरों समेत में ग्रामीण क्षेत्र के इमामबाड़ों की साफ-सफाई और सजावट की जा चुकी है। घरों में अलम और ताज़िया रखने की तैयारियां पूरी कर ली गई हैं।
अकीदतमंदों ने अपने-अपने घरों में कुरआन खानी, मिलाद और मजरिस का आयोजन किया वहीं मातमी दस्तों ने भी काले लिबास में निकलकर या अंजुमनों में शामिल होकर कर्बला के शहीदों को याद किया।इमामबाड़ा सूफियाना के प्रबंधक डॉ अमीर अब्बास ने बताया कि मोहर्रम का यह महीना इस्लामी इतिहास की सबसे बड़ी कुर्बानी की याद में मनाया जाता है।
जब इमाम हुसैन ने कर्बला में सत्य और इंसानियत की रक्षा के लिए अपने परिवार और साथियों के साथ शहादत दी थी।अगले दस दिनों तक चलने वाले इस ग़मगीन पर्व के दौरान विभिन्न स्थानों पर मजलिस, जुलूस और ताज़िया निकलने की परंपरा निभाई जाएगी।
सीओ रुदौली आशीष निगम ने बताया कि मोहर्रम को शांतिपूर्वक संपन्न कराने के लिए सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी है। संवेदनशील इलाकों में पुलिस बल की तैनाती की गई है और अफसर लगातार निगरानी कर रहे हैं।








