लखनऊ, प्रदेश सरकार ने नगरीय प्रशासन में पारदर्शिता, उत्तरदायित्व और वित्तीय मजबूती सुनिश्चित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण निर्णय लिया है। प्रदेश के सभी नगर निगमों, नगर पालिका परिषदों और नगर पंचायतों में संपत्ति कर निर्धारण सूची में संशोधन एवं नामांतरण की प्रक्रिया को अब मानक उपविधियों के तहत एकरूप और पारदर्शी बनाया जाएगा।
यह उपविधियां उत्तर प्रदेश नगर निगम पालिका वित्तीय संसाधन विकास बोर्ड द्वारा तैयार की गई है औरा इन्हें सभी नगरीय निकायों के बोर्ड अनुमोदन के पश्चात लागू किया जाएगा।
अब तक नगरीय निकायों में नामांतरण शुल्क एवं सम्पत्ति कर निर्धारण की कोई एक समान व्यवस्था नही थी। कहीं निश्चित शुल्क वसूला जाता था तो कहीं संपत्ति के विक्रय मूल्य पर 1% से 2% तक शुल्क लगाया जाता था। नई मानक उपविधियां के माध्यम से इन सभी विसंगतियों को समाप्त किया जाएगा और सभी निकायों में एक समान प्रक्रिया लागू की जाएगी।
इन उपविधियांे के तहत अब संपत्ति स्वामित्व परिवर्तन या संशोधन हेतु आवेदन आनलाइन पोर्टल मे माध्यम से किया जाएगा। विवाद रहित मामलों का निस्तारण अधिकतम 45 कार्य दिवसों समय सीमा के अन्तर्गत किया जाएगा।
शुल्क का निर्धारण स्पष्ट रूप से संपत्ति के क्षेत्रफल अथवा मूल्य के आधार पर किया गया है। उत्तराधिकार या पंजीकृत वसीयत के मामलों में नगर निगमों में यह शुल्क रू0 1,000.000 से रू0 5,000.00 के बीच होगा (संपत्ति क्षेत्रफल के आधार पर), निर्धारित किया गया है।
विक्रय विलेख या दान पात्र जैसे अन्य मामलों में शुल्क संपत्ति के मूल्य से जोड़ा गया है। रू0 5 लाख तक की संपत्ति पर रू0 1,000.00 रू0 50 लाख से अधिक मूल्य की संपत्तियों पर रू0 10,000.00 तक शुल्क लिया जाएगा।
प्रत्येक नामांतरण के लिए एक माह पूर्व सार्वजनिक सूचना/नोटिस जारी की जाएगी ताकि कोई आपत्ति हो तो उसे सुना जा सके। यदि निर्धारित समय तक कोई आपत्ति प्राप्त नहीं होती है तो प्रविष्टि को अंतिम रूप दे दिया जाएगा।
यदि कोई सम्पत्ति आती है तो सम्बन्धित पक्षों को सुनवाई का अवसर दिया जाएगा और उसके बाद ही निर्णय लिया जाएगा। साथ ही, इस व्यवस्था के अन्तर्गत 30 दिन के भीतर अपील का अधिकार भी प्रदान किया गया है।
इस निर्णय पर प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए नगर विकास विभाग के मंत्री श्री एके शर्मा ने कहाः
‘‘प्रदेश में पारदर्शी, डिजिटल और नागरिक-केन्द्रित संपत्ति कर प्रणाली स्थापित करना हमारा लक्ष्य है। ये मानक उपविधियां नगरीय निकायों में एकरूपता लाकर लंबित विवादों का समाधान करेंगी और राजस्व को बढ़ावा देंगी।
नगर निगमों हेतु यह उपविधि उत्तर प्रदेश नगर निगम अधिनियम, 1959 और नगर पालिका परिषदों/नगर पंचायतों हेतु उत्तर प्रदेश नगर पालिका अधिनियम, 1916 के तहत बनाई गई है। अब सभी नगरीय निकायों को निर्देश दिये जाएंगे कि वे इन उपविधियों को अपने-अपने बोर्ड से अनुमोदित कर लागू करें।
इन उपविधियों के लागू होने से संपत्ति से सम्बन्धित नामांतरण प्रक्रिया अधिक पारदर्शी, समयबद्ध और सुगम बनेंगे। यह नगरीय निकायों की राजस्व व्यवस्था को सशक्त बनाएगा और ई-गवर्नेंस के लक्ष्यों की पूर्ति की दिशा में एक महत्तवपूर्ण कदम साबित होगा।


