बुलंदशहर, सिविल इंजीनियरिंग की नौकरी करने वाले आरोपियों ने नौकरी जाने के बाद सिंथेटिक दूध और पनीर बनाने का काम शुरू किया था। धीरे-धीरे इनका यह काम बढ़ता चला गया। आरोपियों ने दिल्ली और नोएडा के विभिन्न इलाकों में नकली पनीर और दूध बेचकर मोटी कमाई की।
अधिकारियों की पूछताछ में खुलासा हुआ है कि खुर्जा के गांव अगौरा निवासी सगीर और नफीस ने सिविल से पॉलीटेक्निक की पढ़ाई की हुई है। कोरोना से पहले तक दोनों नोएडा की निजी कंपनी में सिविल इंजीनियर की नौकरी कर रहे थे। कोविड महामारी के दौरान जब लॉकडाउन लगा तो दोनों की नौकरी चली गई। जिसके बाद उन्हें दोबारा नौकरी नहीं मिली और घर चलाने के लिए कर्ज भी लेना पड़ा।
कर्ज चुकता करने के लिए करीब एक साल पहले दोनों ने डेयरी चलाई, लेकिन इसमें नुकसान होने के कारण छह माह डेयरी चलाने के बाद इसे बंद कर दिया गया। फिर से आर्थिक संकट खड़ा होने पर सगीर और नफीस ने सिंथेटिक दूध और पनीर बनाने की योजना तैयार की। इसके बाद उन्होंने फिरोज को साथ लिया और उसके नाम पर सामान खरीदकर सिंथेटिक दूध पनीर बनाकर बेचना शुरू किया।
बताया जा रहा है कि प्रतिदिन औसतन तीन क्विंटल पनीर को तैयार करते हुए वह नोएडा और दिल्ली में बेच रहे थे। जबकि नोएडा व दिल्ली में अपनी दो दुकानों के माध्यम से भी इसे बाजार में बेच रहे थे। सगीर और नफीस को उम्मीद थी कि नकली पनीर के माध्यम से न केवल वह आसानी से कर्ज चुकता कर सकेंगे, बल्कि आर्थिक स्थिति में भी सुधार हो सकेगा।
खाद्य सुरक्षा विभाग के अधिकारियों द्वारा जब आरोपियों को सिंथेटिक पनीर बनाने के मामले में पकड़ा तो पहले तो आरोपी कुछ बताने के लिए तैयार नहीं हुए, लेकिन बाद में जब तलाशी ली गई तो आरोपियों के बेड के अंदर से रसायन बरामद हुए। हालांकि जब आरोपियों से रसायन का नाम पूछा तो वह बता नहीं सके।
अधिकारियों की जांच में सामने आया कि पनीर बनाने के लिए फैक्टरी में दूध खरीदकर महीने में एक या दो बार ही लाया जाता था। जबकि प्रतिदिन तीन क्विंटल पनीर बनाने के लिए औसतन 12 क्विंटल दूध की आवश्यकता होती है।
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