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Bhai dooj: भाई बहन के अटूट प्रेम और विश्वास पर आधारित भाईदूज की लोक कथा और जाने इसका उद्देश्य

admin by admin
November 3, 2025
in उत्तर प्रदेश, देश
0

कार्तिक मास के शुक्ल पक्ष की द्वितीया तिथि को मनाया जाने वाला हिन्दू धर्म का पर्व है जिसे यम द्वितीया भी कहते हैं। यह दीपावली के दो दिन बाद आने वाला ऐसा पर्व है, जो भाई के प्रति बहन के स्नेह को अभिव्यक्त करता है एवं बहनें अपने भाई की खुशहाली के लिए कामना करती हैं। कार्तिक शुक्ल द्वितीया को मनाया जाने वाला भाई दूज का त्योहार भाई-बहन के अटूट प्रेम का प्रतीक है। भैया दूज त्यौहार हर साल कार्तिक महीने के शुक्ल पक्ष की द्वितीया तिथि को मनाया जाता है।

इस दिन बहनें अपने भाइयों के लंबी उम्र और खुशहाली की कामना करती हैं। इससे भाइयों की लंबी उम्र होती है।

आईये यहाँ पढ़ें भाईदूज की लोक कथा

एक बुढ़िया माई थीं, उसके सात बेटे और एक बेटी थी। बेटी कि शादी हो चुकी थी। जब भी उसके बेटे कि शादी होती, फेरों के समय एक नाग आता और उसके बेटे को डस लेता था। बेटे कि वही म्रत्यु हो जाती और बहू विधवा, इस तरह उसके छह बेटे मर गये। सातवे कि शादी होनी बाकी थी। इस तरह अपने बेटों के मर जाने के दुःख से बूढ़ीमाई रो-रो के अंधी हो गयी थी।
या।

अब जब भाई घोड़ी चढ़ने लगा तो बहिन फिर बोली: ये घोड़ी पर क्यू चढ़ेगा, घोड़ी पर तो मैं बैठूँगी, ये तो जलेगा, मरेगा, इसकी लाश को चील कौवे खाएँगे। सब लोग बहुत परेशान। सब ने उसे घोड़ी पर भी चढ़ने दिया।

Bhai dooj ki Katha

अब जब बारात चलने को हुई तब बहिन बोली: ये क्यू दरवाजे से निकलेगा, ये तो पीछे के रास्ते से जाएगा, दरवाजे से तो मैं निकलूंगी। जब वह दरवाजे के नीचे से जा रही थी तो दरवाजा अचानक गिरने लगा। बहिन ने एक ईंट उठा कर अपनी चुनरी में रख ली, दरवाजा वही कि वही रुक गया। सब लोगों को बड़ा अचंभा हुआ। रास्ते में एक जगह बारात रुकी तो भाई को पीपल के पेड़ के नीचे खड़ा कर दिया।

बहिन कहने लगी: ये क्यू छाव में खड़ा होगा, ये तो धूप में खड़ा होगा| छाँव में तो मैं खड़ी होगी।

जैसे ही वह पेड़ के नीचे खड़ी हुई, पेड़ गिरने लगा। बहिन ने एक पत्ता तोड़ कर अपनी चुनरी में रख लिया, पेड़ वही कि वही रुक गया।अब तो सबको विश्वास हो गया कि ये बावली कोई जादू टोना सिख कर आई है, जो बार बार अपने भाई कि रक्षा कर रही है। ऐसे करते करते फेरों का समय आ गया।

जब दुल्हन आई तो उसने दुल्हन के कान में कहा: अब तक तो मैने तेरे पति को बचा लिया, अब तू ही अपने पति को और साथ ही अपने मरे हुए जेठों को बचा सकती है।

फेरों के समय एक नाग आया, वो जैसे ही दूल्हे को डसने को हुआ , दुल्हन ने उसे एक लोटे में भर के उपर से प्लेट से बंद कर दिया। थोड़ी देर बाद नागिन लहर लहर करती आई।

दुल्हन से बोली: तू मेरा पति छोड़।
दुल्हन बोली: पहले तू मेरा पति छोड़।
नागिन ने कहा: ठीक है मैने तेरा पति छोड़ा।
दुल्हन: एसे नहीं, पहले तीन बार बोल।
नागिन ने 3 बार बोला, फिर बोली कि अब मेरे पति को छोड़।
दुल्हन बोली: एक मेरे पति से क्या होगा, हसने बोलने क लिए जेठ भी तो होना चाहिए, एक जेठ भी छोड़।
नागिन ने जेठ के भी प्राण दे ।
फिर दुल्हन ने कहा: एक जेठ से लड़ाई हो गयी तो एक और जेठ। वो विदेश चला गया तो तीसरा जेठ भी छोड़।
इस तरह एक एक करके दुल्हन ने अपने 6 जेठ जीवित करा लिए।

उधर रो रो के बुढ़िया का बुरा हाल था। कि अब तो मेरा सातवा बेटा भी बाकी बेटों कि तरह मर जाएगा। गाँव वालों ने उसे बताया कि उसके सात बेटा और बहुए आ रही है।

तो बुढ़िया बोली: गर यह बात सच हो तो मेरी आँखो कि रोशनी वापस आ जाए और मेरे सीने से दूध कि धार बहने लगे। ऐसा ही हुआ। अपने सारे बहू बेटों को देख कर वह बहुत खुश हुई।
बोली: यह सब तो मेरी बावली का किया है। कहाँ है मेरी बेटी?

सब बहिन को ढूँढने लगे। देखा तो वह भूसे कि कोठरी में सो रही थी। जब उसे पता चला कि उसका भाई सही सलामत है तो वह अपने घर को चली। उसके पीछे पीछे सारी लक्ष्मी भी जाने लगी। बुढ़िया ने कहा: बेटी, पीछे मूड के देख! तू सारी लक्ष्मी ले जाएगी तो तेरे भाई भाभी क्या खाएँगे।

तब बहिन ने पीछे मुड़ के देखा और कहा: जो माँ ने अपने हाथों से दिया वह मेरे साथ चल, बाद बाकी का भाई भाभी के पास रहे। इस तरह एक बहिन ने अपने भाई की रक्षा की।

Tags: भाईदूज की लोक कथा
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