नई दिल्ली, सहारा समूह की चार सहकारी समितियों में जमा रकम वापस पाने का इंतजार कर रहे लाखों निवेशकों के लिए राहत की खबर है। केंद्र सरकार ने CRCS-सहारा रिफंड पोर्टल को दोबारा सक्रिय कर दिया है। इसके साथ करीब 20 लाख लंबित दावों की जांच और प्रोसेसिंग फिर से शुरू हो गई है। पात्र और सत्यापित निवेशकों को अब अधिकतम 10 लाख रुपये तक रिफंड मिल सकता है, जबकि पहले यह सीमा 50 हजार रुपये थी।
सहकारिता मंत्रालय के अनुसार, अब तक 41.56 लाख से अधिक जमाकर्ताओं को करीब 9,267 करोड़ रुपये वापस किए जा चुके हैं। रिफंड की राशि निवेशकों के आधार से जुड़े बैंक खातों में भेजी गई है। अब शेष लंबित दावों की जांच की जा रही है। दस्तावेज, बैंक खाते और जमा से जुड़े रिकॉर्ड सही पाए जाने पर पात्र निवेशकों को रिफंड दिया जाएगा।
सरकार के अनुसार नवंबर 2025 के बाद पोर्टल की IT व्यवस्था, लाइसेंस, हार्डवेयर, AMC और कर्मचारियों से जुड़ी समस्याओं के कारण क्लेम प्रोसेसिंग प्रभावित हुई थी। अब इन तकनीकी और प्रशासनिक दिक्कतों को दूर करने के बाद पोर्टल को फिर से सक्रिय किया गया है। इससे लंबित दावों की प्रक्रिया आगे बढ़ने की उम्मीद है।
पात्र क्लेम की प्रक्रिया पूरी होने के बाद भुगतान सामान्य तौर पर 45 दिनों के भीतर किए जाने का प्रावधान है। हालांकि, इसका अर्थ यह नहीं है कि आवेदन करने के 45 दिन बाद हर स्थिति में पैसा खाते में आ जाएगा। रिफंड से पहले आधार e-KYC, बैंक खाते, जमा रिकॉर्ड और संबंधित सहकारी समिति के दस्तावेजों का सत्यापन किया जाता है। किसी दस्तावेज या जानकारी में कमी पाए जाने पर भुगतान में देरी हो सकती है।
जिन निवेशकों के आवेदन में कमी बताई गई है या जिनका दावा खारिज हुआ है, वे Resubmission Portal के माध्यम से आवश्यक सुधार कर दोबारा दावा जमा कर सकते हैं। निवेशकों को सलाह दी गई है कि आवेदन, रिफंड और क्लेम की स्थिति से जुड़ी जानकारी के लिए केवल आधिकारिक पोर्टल का इस्तेमाल करें। किसी अनजान व्यक्ति या वेबसाइट के साथ OTP, बैंक खाते की जानकारी या अन्य संवेदनशील जानकारी साझा न करें।
सहारा रिफंड प्रक्रिया की समयसीमा भी बढ़ाई गई है। सुप्रीम कोर्ट की अनुमति के बाद रिफंड प्रक्रिया के लिए समयसीमा 31 दिसंबर 2026 तक कर दी गई है। ऐसे में लंबित दावेदारों को अपने आवेदन की स्थिति जांचने और यदि जरूरी हो तो दस्तावेजों में सुधार कर दोबारा दावा प्रस्तुत करने का अवसर मिलेगा।