अयोध्या के तिहुरा माझा के अभिलेख संचालन से जुड़े मामले में दाखिल अवमानना याचिका संख्या 1351/2022, राम सुरत निषाद बनाम नितिश कुमार व अन्य पर इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ खंडपीठ ने महत्वपूर्ण आदेश पारित किया है।
न्यायमूर्ति सौरभ लवानिया की कोर्ट संख्या-7 ने सुनवाई के दौरान उत्तर प्रदेश शासन के राजस्व विभाग की अपर मुख्य सचिव, अयोध्या के जिलाधिकारी शशांक त्रिपाठी और सहायक अभिलेख अधिकारी अयोध्या संजीव कुमार यादव को मामले में पक्षकार बनाए जाने की अनुमति दी है।
1 अक्टूबर 2026 के आदेश में अदालत ने नए पक्षकारों को दो सप्ताह के भीतर संबंधित शपथपत्र दाखिल करने का निर्देश दिया है। साथ ही राज्य की ओर से पेश अपर महाधिवक्ता को यह आदेश उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री के सचिव को भी उपलब्ध कराने का निर्देश दिया गया है। मामले की अगली सुनवाई 23 अक्टूबर 2026 को टॉप-30 मामलों में सूचीबद्ध की गई है।
यह मामला अयोध्या के माझा तिहुरा गांव के अभिलेख संचालन से जुड़ा है। इससे पहले वर्ष 2020 में राम सुरत निषाद और एक अन्य की याचिका पर न्यायमूर्ति सौरभ लवानिया की पीठ ने अभिलेख संचालन की कार्यवाही में तेजी लाने का निर्देश दिया था। उस समय अदालत को बताया गया था कि यह कार्यवाही वर्ष 1984 से लंबित है और याचिका में सहायक अभिलेख अधिकारी को कार्यवाही शीघ्र पूरी करने का निर्देश देने की मांग की गई थी।
अदालत ने तब उपलब्ध कानूनी बाधा न होने की स्थिति में कार्यवाही को एक वर्ष के भीतर यथासंभव पूरा करने का निर्देश दिया था।
अब इसी मामले से जुड़ी अवमानना कार्यवाही में अधिकारियों को पक्षकार बनाए जाने और उनसे शपथपत्र मांगे जाने के बाद अभिलेख संचालन की प्रगति एक बार फिर न्यायिक जांच के दायरे में है।
याचिकाकर्ता राम सुरत निषाद की ओर से अधिवक्ता ओंकार नाथ तिवारी पैरवी कर रहे हैं। अब संबंधित अधिकारियों के शपथपत्र और अगली सुनवाई में सामने आने वाले तथ्यों से यह स्पष्ट होगा कि अभिलेख संचालन से संबंधित न्यायालय के पूर्व निर्देशों के अनुपालन की स्थिति क्या है और मामले में आगे अदालत क्या निर्देश देती है।