हाथरस में दुष्कर्म की शिकार दलित युवती की मौत के छह साल बाद पीड़ित परिवार को पुनर्वास को लेकर अदालत के निर्देश से उनके जीवन में बदलाव आने की उम्मीद है। हालांकि, प्रदेश सरकार निर्धारित समय सीमा में अदालत के निर्देशों का अनुपालन करेगी, इसको लेकर परिवार को संदेह बना हुआ है।
पीड़ित परिवार ने नोएडा या गाजियाबाद में एक मकान उपलब्ध कराने और परिवार के एक सदस्य को नौकरी देने के इलाहाबाद उच्च न्यायालय के निर्देश का यह कहते हुए स्वागत किया है कि परिवार चाहता है कि सरकार किए गए वादों को पूरा करे।
पीड़िता के भाई ने दावा किया कि अदालत ने 2022 में इसी तरह का एक निर्देश दिया था जिसे लागू नहीं किया गया।
उन्होंने बृहस्पतिवार को कहा, “छह साल बीत चुके हैं, लेकिन हमारे लिए कोई बदलाव नहीं आया। हमने इन छह वर्षों में बहुत परेशानियां उठाई हैं। उस समय, कोरोना वायरस फैल रहा था, लेकिन हमारे लिए अब भी यह कोरोना वायरस जैसे हालात हैं। केवल हम लोग ही जानते हैं कि कैसे हम सीआरपीएफ सुरक्षा में चारदीवारी के भीतर रह रहे हैं।
दुष्कर्म की घटना को लेकर देशभर में आक्रोश फैलने के बाद से यह परिवार केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल (सीआरपीएफ) की सुरक्षा में रह रहा है।
मंगलवार को इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने एक याचिका पर सुनवाई करते हुए राज्य सरकार को तीन माह के भीतर पीड़ित परिवार को नोएडा या गाजियाबाद में एक मकान उपलब्ध कराने और परिवार के एक सदस्य को नौकरी देने का निर्देश दिया।
इससे पूर्व, परिवार ने सुरक्षा संबंधी चिंताओं का हवाला देते हुए अलीगढ़, कासगंज या एटा में मकान उपलब्ध कराने का सरकार का प्रस्ताव ठुकरा दिया था। अदालत ने सरकार के नजरिये को ‘‘जिद्दी’’ करार दिया।
परिवार को अब उम्मीद है कि अदालत के ताजा निर्देश का अनुपालन किया जाएगा।
पीड़िता के भाई ने कहा कि उनके छोटे भाई को कुछ राहत मिली है और उनकी दो बेटियां केंद्रीय विद्यालय में पढ़ रही हैं। उन्हें सीआरपीएफ की सुरक्षा में स्कूल पहुंचाया और घर वापस लाया जाता है।
उल्लेखनीय है कि सितंबर, 2020 में चांदपा क्षेत्र के एक गांव में एक दलित युवती के साथ कथित तौर पर दुष्कर्म किया गया था। शुरुआत में उसका इलाज अलीगढ़ के जवाहर लाल नेहरू मेडिकल कॉलेज में किया गया और बाद में उसे दिल्ली के सफदरजंग अस्पताल ले जाया गया जहां इलाज के दौरान 29 सितंबर, 2020 को उसकी मृत्यु हो गई।
पीड़िता का शव हाथरस लाया गया और उसी रात पुलिस द्वारा शव का अंतिम संस्कार कर दिया गया। परिवार ने आरोप लगाया था कि बिना उनकी सहमति के अंतिम संस्कार किया गया। इस मामले में सरकार ने अक्टूबर, 2020 में तत्कालीन पुलिस अधीक्षक और क्षेत्राधिकारी समेत पांच पुलिसकर्मियों को निलंबित कर दिया था।
हाथरस की एससी/एसटी अदालत ने दो मार्च, 2023 को दिए अपने निर्णय में चार आरोपियों में से एक संदीप सिसोदिया को दोषी ठहराते हुए उसे आजीवन कारावास की सजा सुनाई थी। वहीं तीन अन्य आरोपियों- लवकुश, रामू उर्फ राम कुमार और रवि उर्फ रवींद्र सिंह को बरी कर दिया था।









