मुंबई, एचडीएफसी बैंक ने बृहस्पतिवार को कहा कि वह मीडिया कारोबारी सुभाष चंद्रा से जुड़े मामले में राष्ट्रीय कंपनी विधि न्यायाधिकरण (एनसीएलटी) के आदेश के खिलाफ अपीलीय न्यायाधिकरण एनसीएलएटी में अपील करने पर विचार कर रहा है।
न्यायाधिकरण का तर्क: NCLT सदस्य नीलेश शर्मा ने खारिज कीं आपत्तियां; कहा— ‘सुभाष चंद्रा की कुल व्यक्तिगत संपत्ति योजना की राशि से भी काफी कम’
निजी क्षेत्र के सबसे बड़े बैंक ने बयान में कहा कि एनसीएलटी के आदेश के तहत उसके कुल 680 करोड़ रुपये के दावे में से केवल 3.2 प्रतिशत राशि ही स्वीकार की गई है।
एचडीएफसी बैंक ने कहा, “बैंक ने इस कर्ज समाधान योजना का विरोध किया था और इसके खिलाफ मतदान किया था, लेकिन इसे बहुमत से मंजूरी दे दी गई। बैंक राष्ट्रीय कंपनी विधि अपीलीय न्यायाधिकरण (एनसीएलएटी) में अपील दायर करने पर विचार कर रहा है।”
एचडीएफसी बैंक ने कहा कि बैंक के विलय से पहले उसने यह ऋण सुविधा अपनी मूल कंपनी एचडीएफसी लिमिटेड से हासिल की थी।
यह प्रतिक्रिया एनसीएलटी के उस आदेश के एक दिन बाद आई है, जिसमें चंद्रा को 22,006.57 करोड़ रुपये से अधिक के स्वीकृत कर्ज दावों के निपटान के लिए सिर्फ 6.5 करोड़ रुपये का भुगतान करने वाली पुनर्भुगतान योजना को मंजूरी दी गई थी। इससे कर्जदाताओं को अपनी बकाया राशि के करीब 99.97 प्रतिशत हिस्से का नुकसान यानी ‘हेयरकट’ उठाना पड़ेगा।
यह मामला विवेक इन्फ्राकॉन द्वारा लिए गए 170 करोड़ रुपये के ऋण के भुगतान में चूक से जुड़ा है। यह ऋण तत्कालीन इंडियाबुल्स हाउसिंग फाइनेंस ने दिया था जो कि बाद में फंस गया। चंद्रा ने इस ऋण की व्यक्तिगत गारंटी दी थी।
ऋणदाता के एनसीएलटी जाने के बाद चंद्रा के खिलाफ दिवाला प्रक्रिया शुरू हुई और अन्य कर्जदाताओं के दावों को मिलाकर कुल दावे 22,000 करोड़ रुपये से अधिक हो गए।
एनसीएलटी के न्यायिक सदस्य नीलेश शर्मा ने तीसरे सदस्य के रूप में मंगलवार को दिवाला एवं ऋणशोधन अक्षमता संहिता (आईबीसी) की धारा 114 के तहत कर्ज समाधान योजना को मंजूरी दी थी। इससे पहले न्यायाधिकरण की दो सदस्यीय पीठ ने अलग-अलग राय दी थी, जिसके बाद अध्यक्ष ने शर्मा को तीसरे सदस्य के रूप में नियुक्त किया था।
शर्मा ने एलआईसी हाउसिंग फाइनेंस की अगुवाई वाले असहमत कर्जदाताओं की आपत्तियों को खारिज कर दिया था। कर्जदाताओं ने योजना को अव्यावहारिक और गैरकानूनी बताते हुए इस योजना का विरोध किया था।
एनसीएलटी ने अपने आदेश में कहा कि समाधान पेशेवर के आकलन के अनुसार चंद्रा की व्यक्तिगत संपत्ति का मूल्य योजना के तहत प्रस्तावित राशि से भी काफी कम है। इसलिए योजना के खारिज होने पर असहमत कर्जदाताओं को अधिक राशि मिलने की संभावना नहीं थी।
न्यायाधिकरण ने कहा कि उसकी भूमिका कर्जदाताओं के व्यावसायिक फैसले की जगह अपना निर्णय देना या यह आकलन करना नहीं है कि समझौते के तहत तय राशि पर्याप्त है या नहीं।
उसने यह भी कहा कि कर्जदाताओं का व्यावसायिक निर्णय कानूनी ढांचे के दायरे में होता है, उससे बाहर नहीं।










