गाजीपुर,प्रदेश के कैबिनेट मंत्री एवं सुहेलदेव भारतीय समाज पार्टी (सुभासपा) के अध्यक्ष ओम प्रकाश राजभर ने आर्थिक आधार पर आरक्षण का बुधवार को समर्थन किया। सुभासपा सत्ताधारी भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) की सहयोगी है।
राजभर ने कहा कि जो लोग पहले ही ऊंचे पदों पर पहुंच चुके हैं वे आरक्षण का फायदा उठा रहे हैं जबकि गरीब और वंचित लोग इससे महरूम हैं।
राजभर की यह टिप्पणी उनके बेटे और सुभासपा के राष्ट्रीय महासचिव अरविंद राजभर के उस बयान के बाद आई, जिसमें उन्होंने कहा था कि आरक्षण आर्थिक आधार पर दिया जाना चाहिए।
उन्होंने कहा, आज जो व्यक्ति जिलाधिकारी, पुलिस अधीक्षक, पुलिस महानिरीक्षक, पुलिस उप महानिरीक्षक, पुलिस महानिदेशक, राज्यपाल मुख्यमंत्री या राष्ट्रपति बन चुका है, उसे आरक्षण की जरूरत नहीं है।
राजभर ने कहा कि बाबा साहब डॉक्टर भीमराव आंबेडकर ने जो आरक्षण व्यवस्था सोची थी, उसका मकसद गरीबों और वंचितों को ऊपर उठाना और पीछे रह गए लोगों को मुख्यधारा में लाना था। उन्होंने कहा, ”जिन्होंने पहले ही आरक्षण का फायदा उठा लिया है, वे पूरे परिवार के साथ इसका लाभ ले रहे हैं जबकि गरीबों को यह सुविधा नहीं मिल रही है।
राजभर ने तर्क दिया कि आरक्षण का फायदा उन लोगों तक पहुंचना चाहिए जो आर्थिक और सामाजिक रूप से वंचित हैं।
आरक्षित श्रेणियों के भीतर उप-वर्गीकरण पर उच्चतम न्यायालय की हाल की टिप्पणियों का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि हरियाणा ने भी ‘आरक्षण में आरक्षण’ की व्यवस्था लागू की थी।
राजभर ने समाजवादी पार्टी (सपा) के अध्यक्ष अखिलेश यादव पर भी निशाना साधा। उन्होंने अखिलेश को चुनौती दी कि वे घोषणा करें कि अगर पार्टी सरकार बनाती है तो किसी मुस्लिम को उत्तर प्रदेश का मुख्यमंत्री बनाया जाएगा।
उन्होंने यह चुनौती उनके चाचा शिवपाल यादव की हालिया घोषणा के संदर्भ में दी, जिसमें कहा गया था कि अगर अगले साल प्रदेश के विधानसभा चुनाव के बाद सपा की सरकार बनी जेल में बंद पार्टी नेता मोहम्मद आजम खान को गृह मंत्री बनाया जाएगा।
राजभर ने कहा, जिन मुसलमानों ने अखिलेश यादव और उनके पिता को चार बार उत्तर प्रदेश का मुख्यमंत्री बनाया, उन्हें अब बताया जाना चाहिए कि अगला मुख्यमंत्री किसी मुस्लिम को बनाया जाएगा।
राजभर ने दावा किया कि पिछले चुनाव में सपा को पूर्वी उत्तर प्रदेश के जिलों गाजीपुर, आजमगढ़ और आंबेडकर नगर में सुभासपा के समर्थन की वजह से कामयाबी मिली थी। उन्होंने दावा किया कि इस बार इन जिलों में सपा को ‘करारी हार’ का सामना करना पड़ेगा।
सुभासपा अध्यक्ष ने जातिवार जनगणना के मुद्दे पर कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी द्वारा जाति-आधारित जनगणना कराने की घोषणा के बाद विपक्षी दल केंद्र सरकार के इस फैसले का श्रेय लेने की कोशिश कर रहे हैं।
उन्होंने विपक्षी दलों पर अपने राजनीतिक फायदे के लिए जाति के नाम पर मुद्दे उठाने का आरोप लगाया और कहा कि वे केवल अपनी बिरादरी को आगे बढ़ाने की कोशिश कर रहे हैं।










