हिंदू धर्म में नाग पंचमी का पर्व न केवल धार्मिक आस्था बल्कि पौराणिक कथाओं और पर्यावरण संरक्षण के गहरे संदेश से जुड़ा है।
महाभारत ग्रंथ के अनुसार, जब राजा जनमेजय ने अपने पिता की सर्पदंश से हुई मृत्यु का बदला लेने के लिए पूरे नाग वंश का अंत करने हेतु ‘सर्पयज्ञ’ शुरू किया, तब ऋषि जरतकारु के पुत्र आस्तिक मुनि ने नागों की रक्षा की।
यज्ञ में जब तक्षक नाग की आहुति दी जाने वाली थी, तब आस्तिक मुनि ने राजा जनमेजय को तार्किक तर्कों से प्रभावित किया और समझाया कि नागों का अस्तित्व प्रकृति और मानव जाति के संतुलन के लिए बेहद जरूरी है। आस्तिक मुनि के आग्रह पर राजा ने तक्षक को छोड़ दिया और सावन माह की पंचमी तिथि को ही नाग वंश विलुप्त होने से बच गया। मान्यता है कि तभी से नाग पंचमी मनाई जाती है।

भागवत पुराण में नाग पंचमी से जुड़ी एक अन्य प्रसिद्ध कथा कालिया मर्दन की है। इसके अनुसार, यमुना नदी को अपने विष से जहरीला बनाने वाले कालिया नाग का घमंड तोड़ने के लिए बालकृष्ण ने यमुना में छलांग लगाई और उसके फनों पर नृत्य कर उसे परास्त कर दिया। नाग की पत्नियों की प्रार्थना पर श्रीकृष्ण ने उसे मारने के बजाय जीवनदान देकर समुद्र में जाने को कहा, जो हमें अहंकार पर प्रेम और पर्यावरण संतुलन का संदेश देता है।
नाग पंचमी का सामाजिक और सांस्कृतिक पहलू भी काफी समृद्ध है। राजस्थान और गुजरात में महिलाएं सावित्री-नागिन व्रत रखकर पति और संतान की दीर्घायु की कामना करती हैं, जबकि ओडिशा और बंगाल में मां मनसा देवी (नाग देवी) की विशेष पूजा और लोकगीत गाए जाते हैं। महाराष्ट्र में घर के मुख्य द्वार पर नाग का चित्र बनाने की परंपरा है और तमिलनाडु के नागरकोइल मंदिर में विशेष अनुष्ठान आयोजित किए जाते हैं।
पौराणिक कथाओं में नाग पूजा का महत्व
सनातन परंपरा में नागों को केवल जीव नहीं, बल्कि देवता और शिव जी का गण माना गया है। विष्णु पुराण के अनुसार भगवान विष्णु खुद शेषनाग की शैया पर विराजमान होते हैं, वहीं भगवान शिव अपने गले में वासुकी नाग को धारण करते हैं। यही कारण है कि भारतीय संस्कृति में प्रकृति के हर जीव के प्रति दया और सम्मान का भाव सिखाया जाता है।
धार्मिक पहलू के अलावा नाग पंचमी का वैज्ञानिक और व्यावहारिक महत्व भी बहुत गहरा है। सांप खेतों में फसलों को नुकसान पहुंचाने वाले चूहों और कीटों को खाकर किसानों की मदद करते हैं, इसलिए इन्हें ‘कृषक मित्र’ भी कहा जाता है। बारिश के मौसम में बिलों में पानी भरने के कारण सांप बाहर निकलते हैं; ऐसे में यह पर्व इंसान और प्रकृति के बीच सह-अस्तित्व का संदेश देता है।









