अयोध्या, सीतापुर नेत्र चिकित्सालय परिसर स्थित 26 दुकानों पर प्रशासनिक बुलडोजर चलाने की कार्रवाई शुरू कर दी गई है। जिला नेत्र चिकित्सालय समिति के अध्यक्ष व जिलाधिकारी शशांक त्रिपाठी द्वारा जारी नोटिस के बाद प्रशासन ने यह ध्वस्तीकरण की कार्रवाई की।
कार्रवाई का विरोध कर रहे दुकानदारों का आरोप है कि जिलाधिकारी द्वारा जारी नोटिस में खुद स्वीकार किया गया है कि दुकानों की लीज की अवधि अभी 5 वर्ष बाकी है, इसके बावजूद जबरन दुकानें तोड़ी जा रही हैं।
दुकानदारों का कहना है कि वे जुलाई 2026 से दिसंबर 2026 तक का किराया न्यायालय द्वितीय अपर सिविल जज (सीडी) के माध्यम से लगातार जमा कर रहे हैं। पीड़ितों ने कहा कि प्रशासन न तो उन्हें कोई मुआवजा दे रहा है और न ही कहीं वैकल्पिक दुकान आवंटित करने का आश्वासन दे रहा है, बल्कि 25 साल पहले जमा कराई गई मात्र 80 हजार रुपये की धनराशि लौटाने की बात कह रहा है।
मामले में हिंदू महासभा के राष्ट्रीय प्रवक्ता व अधिवक्ता मनीष पांडेय ने प्रशासन की इस कार्रवाई को अन्यायपूर्ण बताते हुए कहा कि दुकानें टूटने से इन परिवारों के सामने रोजी-रोटी का संकट खड़ा हो गया है।
उन्होंने बताया कि इस संबंध में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और उपमुख्यमंत्री बृजेश पाठक को पत्र भेजकर हस्तक्षेप की मांग की गई थी, लेकिन वहां से कोई राहत नहीं मिली।
फिलहाल पीड़ित दुकानदारों ने राहत के लिए सोमवार को हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाने और नई याचिका दाखिल करने की तैयारी कर ली है।










