दिल्ली पुलिस ने एक ऐसे साइबर ठग को गिरफ्तार किया है जो सरकारी वेबसाइटों जैसी फर्जी वेबसाइट कथित रूप से बनाता था और उनके माध्यम से देश भर के लोगों से ठगी करता था।
पुलिस के एक अधिकारी ने मंगलवार को बताया कि इनमें आधिकारिक परिवहन सेवा वेबसाइट से मिलता-जुलता एक फर्जी पोर्टल भी शामिल है।
उत्तर प्रदेश के इटावा निवासी अंशुल यादव नामक आरोपी को वित्तीय जांच के बाद गिरफ्तार किया गया। उसने कंप्यूटर एप्लीकेशन में मास्टर्स (एमसीए) किया हुआ है।
मध्य दिल्ली के पुलिस उपायुक्त (डीसीपी) रोहित राजबीर सिंह ने एक बयान में कहा, ‘आरोपी ने ‘परिवहन.ऑनलाइन’ नामक एक फर्जी वेबसाइट तैयार कर उसका संचालन किया, जिसे सरकारी परिवहन सेवा पोर्टलों जैसा दिखने के लिए डिजाइन किया गया था, ताकि आम लोगों को भ्रमित कर उनका विश्वास जीता जा सके।”’
उन्होंने कहा कि पोर्टल का कथित तौर पर ऑनलाइन वाहन नंबर प्लेट बुकिंग और अन्य परिवहन संबंधी सेवाएं प्रदान करने के बहाने लोगों को ठगने के लिए इस्तेमाल किया गया था।
यह मामला तब सामने आया जब एक शिकायतकर्ता ने आरोप लगाया कि ऑनलाइन वाहन नंबर प्लेट बुक करने के प्रयास में उसके साथ धोखाधड़ी हुई है।
ऑनलाइन खोज के दौरान, शिकायतकर्ता को फर्जी पोर्टल मिला जो सरकारी वेबसाइट से मिलता जुलता था। पोर्टल पर अपने वाहन का विवरण दर्ज करने के बाद, शिकायतकर्ता ने 1,099 रुपये का ऑनलाइन भुगतान किया। इसके बाद, उसे बार-बार अलग-अलग बहाने बनाकर अतिरिक्त भुगतान करने के लिए कहा गया, जिससे संदेह पैदा हुआ।
डीसीपी ने बताया, “शिकायतकर्ता ने राष्ट्रीय साइबर अपराध रिपोर्टिंग पोर्टल (एनसीआरपी) पर मामले की सूचना दी। शिकायत के आधार पर प्राथमिकी दर्ज की गई और जांच शुरू की गई।”
जांच के दौरान पुलिस ने तकनीकी विश्लेषण, वित्तीय लेनदेन की जांच, डोमेन पंजीकरण विवरणों का सत्यापन, आईपी लॉग की जांच और डिजिटल निगरानी की।
जांचकर्ताओं ने पाया कि वेबसाइट को जानबूझकर सरकारी पोर्टलों से मिलता जुलता बनाया गया था ताकि लोगों को ऑनलाइन भुगतान के बहाने ठगा जा सके।
सिंह ने कहा, ‘देश के विभिन्न हिस्सों से मिली कई शिकायतें भी आरोपी और उसके सहयोगियों द्वारा कथित तौर पर संचालित फर्जी वेबसाइटों और बैंक खातों से जुड़ी पाई गईं, जो साइबर धोखाधड़ी नेटवर्क के अंतरराज्यीय प्रभावों का संकेत देती हैं।’
बाद में पुलिस ने इटावा में छापेमारी कर यादव को गिरफ्तार कर लिया। पूछताछ के दौरान आरोपी ने बताया कि उसने कंप्यूटर एप्लीकेशन में मास्टर्स (एमसीए) किया है और उसे वेबसाइट डिजाइनिंग, बैकएंड मैनेजमेंट, डोमेन होस्टिंग और ऑनलाइन पेमेंट सिस्टम तथा क्यूआर-आधारित पेमेंट गेटवे के इंटीग्रेशन में विशेषज्ञता हासिल है।
पुलिस ने बताया कि अन्य सहयोगियों की संलिप्तता, जुड़े हुए बैंक खातों और अतिरिक्त पीड़ितों के संबंध में आगे की जांच जारी है।
दिल्ली पुलिस @DCPCentralDelhi के साइबर थाने की टीम ने फ़र्ज़ी सरकारी वेबसाइट बनाकर लोगों को ठगने वाले गिरोह का किया पर्दाफाश।
यातायात विभाग की वेबसाइट https://t.co/rOFUr1byIx से मिलती-जुलती वेबसाइट बनाकर, अलग-अलग शुल्कों के नाम पर ठगी करने वाले अपराधी को पुलिस टीम ने उ. प्र. के… pic.twitter.com/piIbS6hw2b
— Delhi Police (@DelhiPolice) May 26, 2026










