बड़ा सवाल: आखिर किसके शह पर एनजीटी के आदेशों को ठंडे बस्ते में डाला गया है? क्या जिला प्रशासन ग्रामीणों की सेहत से खिलवाड़ बंद कराकर इस प्रदूषण पर रोक लगाएगा, या फिर उद्योगपतियों के आगे यूं ही आंखें मूंदे रहेगा?
अयोध्या, धार्मिक नगरी अयोध्या से एक बेहद गंभीर और पर्यावरण को नुकसान पहुंचाने वाली खबर सामने आ रही है। नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (NGT) के सख्त निर्देशों के बावजूद अयोध्या में नियमों की सरेआम धज्जियां उड़ाई जा रही हैं।
ताजा मामला ‘अमृत बॉटलर्स कोका-कोला’ कंपनी से जुड़ा है, जहाँ कंपनी द्वारा लगातार छोड़े जा रहे कैमिकल युक्त और गंदे पानी के कारण पूरी तिलोदकी गंगा (स्थानीय जलधारा) और आसपास का इलाका बुरी तरह प्रदूषित हो रहा है।
पूरा ग्रामसभा ‘गंजा’ हुआ संक्रमित, बीमारी का खतरा
स्थानीय सूत्रों से मिली जानकारी के मुताबिक, अमृत बॉटलर्स कोका-कोला फैक्ट्री से निकलने वाला दूषित पानी सीधे तिलोदकी गंगा में बहाया जा रहा है। इस जहरीले पानी की वजह से पूरे ग्रामसभा गंजा का भूजल और पर्यावरण गंभीर रूप से प्रदूषित व संक्रमित हो चुका है। ग्रामीणों का जीना दूभर हो गया है और इलाके में संक्रामक बीमारियों के फैलने का खतरा चरम पर पहुंच गया है।
जिला प्रशासन पर उठ रहे गंभीर सवाल
हैरानी की बात यह है कि इस पूरे मामले में अयोध्या का जिला प्रशासन पूरी तरह मौन साधे हुए है। स्थानीय लोगों का आरोप है कि जिला प्रशासन अमृत बॉटलर्स कोका-कोला प्रबंधन के आगे नतमस्तक नजर आ रहा है, जिसके कारण फैक्ट्री प्रबंधन के हौसले बुलंद हैं और वे बिना किसी डर के पर्यावरण को नुकसान पहुंचा रहे हैं।
NGT के आदेशों को दिखाया ठेंगा
आपको बता दें कि इस मामले की गंभीरता को देखते हुए पूर्व में एनजीटी (NGT) ने अयोध्या जिला प्रशासन को सख्त आदेश जारी किए थे। NGT ने कहा था कि अमृत बॉटलर्स कोका-कोला से निकलने वाले गंदे पानी की रोकथाम के लिए जो भी ट्रीटमेंट प्लांट या सुरक्षा संबंधी निर्माण कार्य बचे हुए हैं, उन्हें जिला प्रशासन जल्द से जल्द शुरू करवाए।
लेकिन हकीकत इसके उलट है। महीनों बीत जाने के बाद भी एनजीटी के आदेशों पर कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई, जिसका खामियाजा आज गंजा ग्रामसभा के हजारों ग्रामीणों को भुगतना पड़ रहा है।
