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Bharat समेत 16 देश अमेरिका की धारा 301 के तहत जांच के दायरे में, क्या है इसके मायने

ब्यूरो पब्लिकन्यूज़360 by ब्यूरो पब्लिकन्यूज़360
March 12, 2026
in अंतराष्ट्रीय, देश
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अमेरिकी व्यापार प्रतिनिधि (यूएसटीआर) ने 11 मार्च को घोषणा की कि उसने भारत और चीन सहित 16 देशों की नीतियों एवं औद्योगिक प्रथाओं की जांच के लिए धारा 301 के तहत नई जांच शुरू की है।

अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप प्रशासन द्वारा लगाए गए व्यापक शुल्क को अमेरिकी उच्चतम न्यायालय द्वारा रद्द किए जाने के बाद राष्ट्रपति ट्रंप ने 24 फरवरी से 150 दिन के लिए सभी देशों पर 10 प्रतिशत आयात शुल्क लगाने की घोषणा की थी।

इस नई जांच की शुरुआत को व्यापार निगरानी में एक बड़ा कदम माना जा रहा है।

जांच क्या है-

अमेरिकी व्यापार प्रतिनिधि (यूएसटीआर) ने 1974 के व्यापार अधिनियम की धारा 301(बी) के तहत विभिन्न देशों की नीतियों, कार्यों तथा प्रथाओं की जांच शुरू करने की घोषणा की। यह जांच विनिर्माण क्षेत्रों में संरचनात्मक अतिरिक्त क्षमता एवं अत्यधिक उत्पादन से जुड़े मुद्दों पर केंद्रित है।

यूएसटीआर के अनुसार, जांच के दौरान यह तय किया जाएगा कि इन देशों की नीतियां और प्रथाएं अनुचित या भेदभावपूर्ण हैं या नहीं और क्या वे अमेरिकी व्यापार पर बोझ डालती हैं या उसे सीमित करती हैं। इस्पात, एल्युमीनियम, वाहन, बैटरी, इलेक्ट्रॉनिक, रसायन, मशीनरी, सेमीकंडक्टर और सौर मॉड्यूल जैसे क्षेत्र जांच के दायरे में हैं।

किन देशों के खिलाफ हो रही है जांच-

जांच में 15 देशों और 27 देशों के समूह यूरोपीय संघ को शामिल किया गया है।

इन देशों में चीन, सिंगापुर, स्विट्जरलैंड, नॉर्वे, इंडोनेशिया, मलेशिया, कंबोडिया, थाईलैंड, दक्षिण कोरिया, वियतनाम, ताइवान, बांग्लादेश, मेक्सिको, जापान और भारत शामिल हैं।

जांच क्यों शुरू की गई-

अमेरिकी उच्चतम न्यायालय द्वारा ट्रंप प्रशासन के शुल्क रद्द किए जाने के बाद 20 फरवरी को ट्रंप ने सभी देशों पर 10 प्रतिशत अस्थायी आयात शुल्क लगाने की घोषणा की।

अमेरिकी राष्ट्रपति के आधिकारिक कार्यालय एवं आवास ‘व्हाइट हाउस’ के तथ्य पत्र (फैक्टशीट) में कहा गया कि राष्ट्रपति ने अमेरिकी व्यापार प्रतिनिधि कार्यालय को धारा 301 के अधिकारों का उपयोग कर उन नीतियों एवं प्रथाओं की जांच करने का निर्देश दिया है जो अमेरिकी व्यापार पर बोझ डालती हैं या उसे सीमित करती हैं।

जांच की प्रक्रिया-

1974 के अमेरिकी व्यापार अधिनियम की धारा 301 के तहत सरकार यह जांच कर सकती है कि किसी विदेशी देश की व्यापारिक प्रथाएं अनुचित या भेदभावपूर्ण हैं या नहीं और क्या वे अमेरिकी व्यापार को नुकसान पहुंचा रही हैं।

आर्थिक शोध संस्थान ग्लोबल ट्रेड रिसर्च इनिशिएटिव (जीटीआरई) के अनुसार जांच में यह देखा जाएगा कि औद्योगिक सब्सिडी, सरकारी समर्थन से विनिर्माण विस्तार, सरकारी कंपनियों की गतिविधियां, बाजार तक पहुंच में बाधाएं, मुद्रा संबंधी नीतियां या घरेलू मांग में कमी जैसी बातें वैश्विक विनिर्माण में अतिरिक्त क्षमता उत्पन्न कर रही हैं या नहीं।

यदि यह साबित हो जाता है तो अमेरिका अतिरिक्त शुल्क, मात्रात्मक प्रतिबंध या अन्य व्यापारिक बाधाएं लगा सकता है।

जांच प्रक्रिया के तहत लिखित टिप्पणियां 17 मार्च से दी जा सकेंगी। कंपनियां, व्यापारिक संगठन और सरकारें इस पर अपनी राय दे सकती हैं।

लिखित प्रस्तुतियां और सुनवाई में भाग लेने के आवेदन 15 अप्रैल तक जमा करने होंगे। सार्वजनिक सुनवाई पांच से आठ मई तक वॉशिंगटन स्थित अमेरिकी अंतरराष्ट्रीय व्यापार आयोग में होगी।

भारत के लिए इस जांच के क्या मायने हैं-

जीटीआरआई के अनुसार जांच में भारत के कुछ क्षेत्रों में संरचनात्मक अतिरिक्त क्षमता या निर्यात अधिशेष होने की संभावना बताई गई है। इनमें सौर मॉड्यूल, पेट्रोरसायन, इस्पात, वस्त्र, स्वास्थ्य संबंधी वस्तुएं, निर्माण सामग्री व वाहन उत्पाद शामिल हैं।

इसके संस्थापक अजय श्रीवास्तव ने कहा कि भारत की सौर मॉड्यूल विनिर्माण क्षमता घरेलू मांग से लगभग तीन गुना हो चुकी है, जिससे निर्यात आधारित उत्पादन अधिशेष की संभावना दिखती है।

इस बीच निर्यातकों के शीर्ष संघ भारतीय निर्यात संगठन महासंघ (फियो) के महानिदेशक अजय सहाय ने कहा कि यह जांच मुख्य रूप से वैश्विक विनिर्माण में अतिरिक्त क्षमता की चिंता से निपटने के लिए है।

उन्होंने कहा, ‘‘ भारत के निर्यात में वृद्धि मुख्य रूप से मांग आधारित और विविध है। इसलिए तत्काल कोई चिंता नहीं दिखती, हालांकि स्थिति पर नजर रखने की जरूरत होगी।

शुल्क लगाने के लिए अमेरिका किन कानूनों का उपयोग कर रहा है-

अंतरराष्ट्रीय आपातकालीन आर्थिक शक्तियां अधिनियम, 1977: ट्रंप ने फरवरी 2025 में इसके तहत शुल्क लगाए थे लेकिन अदालत ने 20 फरवरी को फैसला दिया कि इस कानून के तहत शुल्क नहीं लगाए जा सकते।

1974 का व्यापार अधिनियम – धारा 122: ट्रंप ने 20 फरवरी 2026 को इसके तहत सभी देशों पर 150 दिन के लिए 10 प्रतिशत शुल्क लगाया। राष्ट्रपति इसे 15 प्रतिशत तक बढ़ा सकते हैं।

1962 का व्यापार विस्तार अधिनियम – धारा 232: राष्ट्रीय सुरक्षा के आधार पर इस्पात, एल्युमीनियम और वाहन पुर्जों जैसे क्षेत्रों में शुल्क लगाए गए हैं।

1974 का व्यापार अधिनियम – धारा 301: यह अमेरिकी व्यापार को प्रभावित करने वाली अनुचित विदेशी प्रथाओं के खिलाफ कार्रवाई का प्रमुख प्रावधान है।

1974 का व्यापार अधिनियम – धारा 302(बी): इसके तहत अमेरिकी व्यापार प्रतिनिधि कार्यालय स्वयं भी धारा 301 के तहत जांच शुरू कर सकता है।

Tags: Bharat समेत 16 देश अमेरिका की धारा 301
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