लखनऊ, नफरत फैलाने वाला भाषण देने के मामले में दो साल की सजा पर इलाहाबाद उच्च न्यायालय द्वारा रोक लगाए जाने के बाद उत्तर प्रदेश की मऊ सदर सीट से सुहेलदेव भारतीय समाज पार्टी (सुभासपा) के विधायक अब्बास अंसारी की विधानसभा की सदस्यता बहाल कर दी गई है।
इससे पहले विधानसभा के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया था कि अब्बास अंसारी की विधानसभा सदस्यता खत्म कर दी गई थी और मऊ सदर सीट को रिक्त घोषित कर दिया गया था।
इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने 2022 के भड़काऊ भाषण मामले में मुख्तार अंसारी के बेटे अब्बास अंसारी की दोषसिद्धि को 20 अगस्त को रद्द कर दिया था।
न्यायमूर्ति समीर जैन ने विशेष सांसद/विधायक (एमपी/एमएलए) अदालत के उस आदेश को खारिज कर दिया जिसमें उन्हें दो साल के कठोर कारावास की सजा सुनाई गई थी।
मऊ की विशेष अदालत ने 31 मई को नफरती भाषण मामले में अब्बास को दोषी ठहराया और दो साल की कैद की सजा सुनाई थी।
मऊ सदर सीट से सुभासपा के विधायक और पूर्व बाहुबली मुख्तार अंसारी के बेटे अब्बास अंसारी को विशेष एमपी-एमएलए अदालत ने नफरत भरे भाषण के मामले में दोषी करार देते हुए दो साल की सजा सुनायी थी।
अभियोजन पक्ष के अनुसार पिछले विधानसभा चुनाव के दौरान मऊ सदर सीट से सुभासपा के प्रत्याशी के तौर पर चुनाव मैदान में उतरे अब्बास अंसारी ने तीन मार्च 2022 को पहाड़पुर मैदान में एक जनसभा के दौरान मऊ प्रशासन को चुनाव के बाद सबक सिखाने की धमकी दी थी।
अंसारी की सदस्यता बहाल होने के बाद अब मऊ विधानसभा में उप चुनाव को लेकर शुरू हुई सियासी सरगर्मी पर भी विराम लग गया।


