राम की पैड़ी पर आयोजित अंतराष्ट्रीय रामायण कॉनक्लेव में रामर्चना के अंतर्गत आमंत्रित कवियों ने रामरस से सराबोर कविताएं सुनाकर उपस्थित जनसमूह को आनंदित कर दिया।
इस काव्य संध्या में देहरादून से आए वरिष्ठ कवि और नवगीत के सशक्त हस्ताक्षर डॉ.बुद्धिनाथ मिश्र की अध्यक्षता में सबसे पहले वाणी वंदना दिल्ली से आई कवियत्री कीर्ति काले ने किया।

इसके बाद काव्य संध्या का आरंभ करते हुए अयोध्या के हास्य व्यंग के कवि तारा चंद तन्हा ने अपनी रचना मैं मन में थे जिनके लिए श्रद्धा लिए हुए,एक दिन वो मिले, हाथ में अद्धा लिए हुए। सुनाकर सभी को ठहाके लगाने पर विवश कर दिया किन्तु अगली ही पंक्ति, करते रहे चोरी से वो,जंगल का सफाया, मंत्री बने फोटो छपी,हाथ में पौधा लिए हुए,सुनकर सभी ने व्यंग की उस चुभन को महसूस किया।

इसके बाद मंच पर दिल्ली से आई अंतराष्ट्रीय ख्याति प्राप्त कवियत्री कीर्ति काले ने श्रीराम पर अपना गीत पढ़ा राम जी ही नदिया है,रामजी ही नइया, रामजी ही पतवार,रामजी ही खेवैया तो सारा जनसमूह जय श्रीराम के उद्घोष से गूंज उठा। इसी क्रम में बेटी की विदाई का बेहद भावुक गीत सुनाया तो सभी की आँखें भर आई, भर भर आए नैना,दिन रैना नहीं चैना,मन में उठा भूचाल रे,के बिटिया चली है ससुराल।

भावनाओं के इस सागर से निकाल कर एक बार फिर सभी को श्रीराम के अयोध्या स्थापित होने के उल्लास से परिचित कराया बाराबंकी से आए कवि विनय शुक्ल ने,कौशलपुरी के रतन राम है,असहायों के लिए जतन राम है, भरत के शीश पर चरण राम है,आदि अंत जनम मरण सब राम है। भारत का हर कण कण राम है,हमारी हर धड़कन राम है,झूठे बेर शबरी के जो खा गए,अवधपुरी में वही राम आ गए।
लखनऊ से आए वीर रस के अतुल बाजपेई ने श्रीराम को राष्ट्रीयता से जोड़ते हुए सुनाया श्रीराम है प्रतीक रूप मेरी राष्ट्रीयता के,राम बिना भारत की कोई पहचान क्या। एकता अस्मिता के शिखर पुरुष राम,राम बिना भारत की आन बान शान क्या। लोक और वेद के समस्त गुण धाम राम,राम को नकारने से बड़ा अपमान क्या।

श्रोताओं की वाह के मध्य कवियों ने अनेक रचनाएं सुनाई। राम की पैड़ी पर साहित्य और कविता की ऐसी शाम सभी को आकर्षित कर रही थी। ऐसे में काव्य पाठ करने डॉ बुद्धिनाथ मिश्र ने मंच संभाला और पढ़ा जो सजा मिली है जिसको,काटना उसे ही है, एक सांस कम ज्यादा,जिंदगी नहीं होती। ना यहां जमानत है,ना यहां कोई वकालत है,राम की कचहरी में,पैरवी नहीं होती, सुनाकर सभी को मुग्ध कर दिया। अपने गीतों की श्रृंखला में उन्होंने अपना प्रसिद्ध गीत पढ़ा, समय शिला पर सूर्य रश्मि से लिखा तुम्हारा नाम,जग कहता धरती की धड़कन,हम कहते है राम। वामन से विराट तक,जो है सबका पालनहार। करुण सागर,आर्त जलों का,दुखियों के आधार।मर्यादा की शिखर कल्पना,पाती जहां विराम,जग कहता धरती की धड़कन,हम कहते है राम, तो तालियों से वातावरण गूंज उठा।

देर रात्रि तक चले इस काव्य पाठ के बाद कवियों का सम्मान अंगवस्त्र और स्मृति चिन्ह प्रदान कर अंतराष्ट्रीय रामायण एवं वैदिक शोध संस्थान के सलाहकार आशुतोष द्विवेदी ने किया।इस अवसर पर कार्यक्रम अधिकारी रमेश चंद्र,अंकित,नैना सुमन,मनीष तिवारी,विवेक पांडे,समेत भारी संख्या में संतजन और श्रोता उपस्थित थे।


