लखनऊ, इलाहाबाद उच्च न्यायालय की लखनऊ पीठ ने झांसी स्थित जल संस्थान के महाप्रबंधक के स्थानांतरण आदेश को खारिज करते हुए कहा कि आचार संहिता लागू होने के बाद पूर्व से जारी स्थानांतरण आदेश को भी क्रियान्वित नहीं किया जा सकता।
अदालत ने कहा कि ऐसे स्थानांतरण आदेश के क्रियान्वयन के लिए निर्वाचन आयोग की अनुमति आवश्यक है हालांकि सरकार नियमानुसार याची का स्थानांतरण करने के लिए स्वतंत्र है।
न्यायमूर्ति श्रीप्रकाश सिंह की पीठ ने सोमवार को महाप्रबंधक मनोज कुमार आर्या की याचिका पर यह आदेश पारित किया।
इसके साथ ही लखनऊ पीठ ने 16 मार्च को महाप्रबंधक (जल कार्य) को स्थानांतरित करने के राज्य सरकार के आदेश को रद्द कर दिया।
निर्वाचन आयोग द्वारा चुनाव कार्यक्रम की घोषणा के बाद लोकसभा चुनाव के लिए आदर्श आचार संहिता (एमसीसी) 16 मार्च को लागू हो गई।
लखनऊ, इलाहाबाद उच्च न्यायालय की लखनऊ पीठ ने झांसी स्थित जल संस्थान के महाप्रबंधक के स्थानांतरण आदेश को खारिज करते हुए कहा कि आचार संहिता लागू होने के बाद पूर्व से जारी स्थानांतरण आदेश को भी क्रियान्वित नहीं किया जा सकता।
अदालत ने कहा कि ऐसे स्थानांतरण आदेश के क्रियान्वयन के लिए निर्वाचन आयोग की अनुमति आवश्यक है हालांकि सरकार नियमानुसार याची का स्थानांतरण करने के लिए स्वतंत्र है।
न्यायमूर्ति श्रीप्रकाश सिंह की पीठ ने सोमवार को महाप्रबंधक मनोज कुमार आर्या की याचिका पर यह आदेश पारित किया।
लखनऊ में महाप्रबंधक (जल कार्य) के पद पर तैनात याचिकाकर्ता मनोज कुमार को 16 मार्च को स्थानांतरित कर दिया गया था और उनका कार्यमुक्ति आदेश उन्हें उसी दिन रात साढ़े आठ बजे दिया गया था।
याचिका में कहा गया कि 16 मार्च को अपरान्ह तीन बजे आम चुनावों की घोषणा के साथ देश में आचार संहिता लागू हो गई और उसके बाद निर्वाचन आयोग की बिना मंजूरी के आदेश जारी करना अवैध है।
पीठ ने आदर्श आचार संहिता के पैरा 19.4 के प्रावधानों पर विचार करते हुए कहा कि अपराह्न तीन बजे के बाद आयोग की पूर्व मंजूरी के बिना कोई भी स्थानांतरण आदेश पारित नहीं किया जा सकता।
पीठ ने अपने आदेश में कहा, ”आदर्श आचार संहिता के प्रावधानों और प्रचलित कानूनों का पालन करते हुए यदि आवश्यक हो तो राज्य को अपने विवेक से नया निर्णय लेने की स्वतंत्रता दी जाती है।”


