दिल्ली उच्च न्यायालय ने मंगलवार को आदेश दिया कि राष्ट्रीय राजधानी में सभी बार एसोसिएशन के चुनाव दो साल के समान कार्यकाल के लिए एक ही दिन होंगे।
उच्च न्यायालय ने कहा कि एक उम्मीदवार एक से अधिक बार एसोसिएशन के लिए चुनाव नहीं लड़ सकता, भले ही वह कई अदालतों में वकालत करता हो। दिल्ली में छह जिला अदालतें हैं।
कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश मनमोहन और न्यायमूर्ति राजीव शकधर और न्यायमूर्ति सुरेश कुमार कैत की पीठ ने एक आदेश में कहा, ‘चुनावों में शुचिता सुनिश्चित करने और धनबल के इस्तेमाल पर अंकुश लगाने के लिए, यह अदालत चुनावी पार्टी की मेजबानी, पोस्टर छापने और होर्डिंग लगाने पर रोक लगाती है।’
पीठ ने कहा कि उम्मीदवार कानूनी बिरादरी के हित में प्रस्तावित सुधारों के लिए अपने विचारों का प्रचार करने के लिए भौतिक और डिजिटल बैठकें कर सकते हैं और व्हाट्सऐप या अन्य सोशल मीडिया का उपयोग कर सकते हैं।
उच्च न्यायालय उन याचिकाओं पर सुनवाई कर रहा था कि क्या विभिन्न बार एसोसिएशन की कार्यकारी समितियों के चुनाव एकसाथ होने चाहिए और क्या ऐसी समितियों का कार्यकाल एकसमान अवधि का होना चाहिए।
याचिकाओं में उठाये गए अन्य मुद्दे ये थे कि क्या सभी वकीलों को पहचान/प्रॉक्सिमिटी कार्ड और रेडियो फ्रीक्वेंसी पहचान टैग/स्टिकर (आरएफआईडी) अनिवार्य रूप से जारी किए जाने चाहिए और ये किसके द्वारा जारी किये जाने चाहिए।
अदालत ने फैसला सुनाया, ‘‘सभी जिला अदालत बार एसोसिएशन, दिल्ली उच्च न्यायालय बार एसोसिएशन और दिल्ली में न्यायाधिकरणों से जुड़े सभी बार एसोसिएशन की सहमति से, यह निर्देशित किया जाता है कि उनकी कार्यकारी समितियों के चुनाव एकसाथ यानी एक ही दिन होंगे और ऐसी सभी कार्यकारी समितियां दो साल की एक समान अवधि के लिए होंगी।”
इसमें कहा गया है कि चुनाव सभी वकीलों को आईडी/प्रॉक्सिमिटी कार्ड और आरएफआईडी जारी करने के बाद ही होंगे ताकि यह सुनिश्चित हो सके कि प्रक्रिया निष्पक्ष और पारदर्शी है।
पीठ ने कहा कि चूंकि दिल्ली में सभी बार एसोसिएशन का कार्यकाल सितंबर 2024 में समाप्त हो रहा है, इसलिए 19 अक्टूबर को चुनाव कराना उचित होगा।
उसने कहा कि कुछ बार एसोसिएशन के चुनाव, जिनका कार्यकाल पहले ही समाप्त हो चुका है, अप्रैल या मई, 2024 में कराना न तो व्यावहारिक है और ना ही संभव क्योंकि देश में आम चुनाव होने हैं, जिसके कारण ईवीएम और सुरक्षा बल उपलब्ध नहीं हो सकते।


