अयोध्या, कहते हैं अपराधी चाहे जितनी होशियारी कर ले पर सच सामने आ जाता है। जिससे वह के कानून के शिकंजे में फंस जाता है।
कुछ ऐसा ही कुछ साधुवेशधारी भू-माफियाओं के द्वारा गुप्तारघाट स्थिति लक्ष्मी नरसिंह मंदिर व पंचमुखी हनुमान मंदिर की संपत्ति को जालसाजी व धोखाधड़ी करके हथियाने के चक्कर मे कानून के शिकंजे में फंस गया।
साधुवेशधारी भू-माफिया जो पूजनीय सन्त के रूप में सत्ता के गलियारों में अपनी पहुंच रखते हैं और यही वजह है कि अधिकारी गण भी उनके गुनाहों पर पर्दा डाल कर धृतिराष्ट्र बन गए और इनके कारनामें बढ़ते गए।
आखिरकार जब कोर्ट का आदेश हुआ तो इनके काले कारनामों के खिलाफ कैंट थाने में गम्भीर धाराओं में मुकदमा दर्ज हो गया। जिसमे पांच साधुवेशधारी भू-माफियाओं पर पीड़ित चतुर्भुज दास उर्फ चन्दाबाबा ने मुकदमा दर्ज कराया है।
अब 161 सीआरपीसी के तहत विवेचक व एसएसपी तहत घटना के सम्बंध में 62 पृष्ठ में अपना बयान साक्ष्य सबूत देकर जालसाज गैंग का पर्दाफाश कर दिया है और उन सभी संगठित गिरोह पर गंगेस्टर एक्ट के तहत कार्यवाही करके गिरफ्तार की मांग की है तथा सभी आरोपियों का आपराधिक इतिहास भी विवेचक को दिया है।
जिसमे प्रमुख रूप से अयोध्या जानकीघाट रामबल्लभाकुंज के कथित अधिकारी राज कुमार दास हैं तथा दूसरे छोटी छावनी के चर्चित महन्थ नित्य गोपाल दास महराज के उत्तराधिकारी महन्थ कमल नयन दास है, तीसरे उनकी के शिष्य विमल कृष्ण दास है तथा वीरेंद्र नाथ राय व संजय यादव है, जो अयोध्या फैज़ाबाद में निवास करते है।
ये सभी अब पुलिस की गिरफ्तारी के भय से अंडर ग्राउंड हो गए है। इनमे से कुछ आदेश के खिलाफ उच्च न्यायालय में चक्कर लगा रहे हैं।









