नयी दिल्ली, उच्चतम न्यायालय ने भारत के प्रधान न्यायाधीश सूर्यकांत की अदालत में मामलों की तत्काल सुनवाई के लिए किए जाने वाले अनुरोधों के सीधे प्रसारण पर बुधवार को रोक लगा दी।
उच्चतम न्यायालय में वकील या स्वयं अपना पक्ष रखने वाले याचिकाकर्ता किसी मामले की तत्काल सुनवाई या उसे जल्द सुनवाई के लिए सूचीबद्ध करने का मौखिक अथवा लिखित अनुरोध प्रधान न्यायाधीश या किसी पीठ से कर सकते हैं। इस प्रक्रिया को ‘मेंशनिंग’ कहा जाता है।
इससे पहले मंगलवार को एक वकील ने कांग्रेस नेता राहुल गांधी से संबंधित एक मामले की तत्काल सुनवाई का अनुरोध किया था, जिस पर प्रधान न्यायाधीश ने नाराजगी जताई थी। इसके बाद यह कदम उठाया गया है।
प्रधान न्यायाधीश ने बिना कोई स्पष्ट मुद्दा सामने रखे मामलों की तत्काल सुनवाई का अनुरोध करने पर वकीलों के प्रति नाराजगी जताई थी। उन्होंने इसे ‘‘सबसे बड़ी परेशानी’’ करार देते हुए कहा था कि इस तरह के अनुरोध करने का चलन ‘‘पूरी तरह बंद होना चाहिए।’’
उच्चतम न्यायालय ने एक परिपत्र भी जारी किया है, जिसके अनुसार दो नवंबर से किसी भी वरिष्ठ अधिवक्ता को किसी भी अदालत में तत्काल सुनवाई के लिए मौखिक अनुरोध करने की अनुमति नहीं होगी।
परिपत्र में कहा गया, ‘‘सभी संबंधित पक्षों को सूचित किया जाता है कि इसके बजाय युवा और कनिष्ठ अधिवक्ताओं को अदालतों में तत्काल सुनवाई के लिए मौखिक अनुरोध करने को प्रोत्साहित किया जा सकता है।