अयोध्या में 300 बेड के सुपर स्पेशियलिटी अस्पताल के निर्माण के लिए दुकानदारों को बिना पुनर्वास की व्यवस्था किए या मुआवजा दिए बेदखल करने की कार्रवाई पर इलाहाबाद हाई कोर्ट की लखनऊ खंडपीठ ने कड़ी टिप्पणी की है।
अदालत ने इस कार्रवाई को घोर निंदनीय करार देते हुए राज्य के चिकित्सा एवं स्वास्थ्य विभाग से जवाब मांगा है। मामले की अगली सुनवाई 16 नवंबर को होगी।
न्यायमूर्ति शेखर बी सराफ और न्यायमूर्ति अमिताभ कुमार राय की खंडपीठ ने कहा कि अस्पताल का निर्माण जनहित में हो सकता है, लेकिन अपनी आजीविका के लिए कारोबार कर रहे दुकानदारों को बिना वैकल्पिक व्यवस्था के बेदखल नहीं किया जा सकता। अदालत ने यह भी कहा कि जब दुकानदारों को पट्टे पर दुकानें आवंटित की गई हैं और वे पट्टेदार हैं, तो पट्टा समाप्त किए बिना उनसे परिसर खाली करने को कहना अनुचित है।
पीठ ने टिप्पणी की कि इस तरह की कार्रवाई से दुकानदारों की आजीविका का अधिकार प्रभावित होता है और यह संविधान के अनुच्छेद 19 और 21 से जुड़े अधिकारों का उल्लंघन हो सकता है। अदालत ने कहा कि प्रभावित दुकानदारों के पुनर्वास या उनके नुकसान के बदले मुआवजे की व्यवस्था पर विचार किया जाना जरूरी है।
अदालत ने राज्य के चिकित्सा एवं स्वास्थ्य विभाग को तीन सप्ताह के भीतर जवाबी हलफनामा दाखिल करने का निर्देश दिया है। हलफनामा सचिव स्तर से नीचे के अधिकारी की ओर से दाखिल नहीं किया जा सकेगा। विभाग को बताना होगा कि प्रभावित दुकानदारों के पुनर्वास या मुआवजे के लिए क्या कदम उठाए जाने हैं।
यह आदेश मोहम्मद नईम और पांच अन्य याचिकाकर्ताओं की ओर से दाखिल याचिका पर सुनवाई के दौरान दिया गया। याचिकाकर्ताओं का कहना है कि वर्ष 2000 में सीतापुर नेत्र चिकित्सालय सोसायटी, फैजाबाद की ओर से उन्हें 30 वर्ष के पट्टे पर दुकानें आवंटित की गई थीं। निर्धारित औपचारिकताएं पूरी होने के बाद 28 फरवरी 2000 को दुकानों का कब्जा भी सौंप दिया गया था। याचिकाकर्ताओं के अनुसार, संबंधित नियमावली में प्रत्येक 30 वर्ष बाद पट्टे के नवीनीकरण का प्रावधान है।
याचिका के मुताबिक, इसके बावजूद अयोध्या के जिलाधिकारी ने 26 जून 2025 को नोटिस जारी कर दुकानदारों को 15 दिन के भीतर दुकानें खाली करने का निर्देश दिया था। नोटिस में कहा गया था कि संबंधित भूमि और दुकानें चिकित्सा एवं परिवार कल्याण विभाग को हस्तांतरित कर दी गई हैं।
दुकानदारों ने पहले भी हाई कोर्ट का रुख किया था। उस समय अदालत ने उनके प्रत्यावेदन पर निर्णय होने तक यथास्थिति बनाए रखने का निर्देश दिया था। इसके बाद जिलाधिकारी ने 31 जुलाई 2026 के आदेश में कहा कि 300 बेड के सुपर स्पेशियलिटी अस्पताल के निर्माण के लिए जमीन की आवश्यकता है और दुकानदारों को वहां बने रहने का अधिकार नहीं है। इसी कार्रवाई को चुनौती देते हुए याचिकाकर्ताओं ने फिर अदालत का दरवाजा खटखटाया।