लखनऊ, इलाहाबाद उच्च न्यायालय की लखनऊ पीठ ने मंगलवार को उप्र के लोक निर्माण विभाग (पीडब्ल्यूडी) के प्रमुख सचिव अजय चौहान के खिलाफ अवमानना का आरोप तय किया।
उन पर कई विभागों से संबंधित कर्मचारियों के वेतन पुनर्निर्धारण, बकाए वेतन का भुगतान और संशोधित पेंशन भुगतान के चार साल पुराने अदालत के आदेश का अनुपालन नहीं करने के आरोप हैं।
पीठ ने इसके पहले पांच अक्टूबर को वित्त विभाग के अपर मुख्य सचिव दीपक कुमार, नमामि गंगे एवं ग्रामीण जलापूर्ति तथा लघु सिंचाई विभाग के प्रमुख सचिव अनुराग श्रीवास्तव, सिंचाई विभाग के प्रमुख सचिव अनिल गर्ग और ग्रामीण अभियंत्रण विभाग के प्रमुख सचिव सौरभ बाबू के खिलाफ अवमानना के आरोप तय किये थे।
अदालत ने इन सभी अधिकारियों को 15 दिन में अवमानना के आरोप पर जवाब देने का आदेश दिया है। मामले की अगली सुनवाई चार नवंबर को होगी।
पीठ ने मंगलवार को दिए गए अपने आदेश में दोहराया कि उसके 19 जुलाई, 2022 के आदेश का पालन नहीं किया गया है। अदालत ने प्रथम दृष्टया माना कि अधिकारी रिट अदालत आदेश का पालन करने के इच्छुक नहीं दिख रहे हैं।
न्यायमूर्ति सौरभ लवानिया की एकल पीठ ने यह कार्रवाई सुरेश चंद्र वर्मा के मामले में दिए फैसले के अनुपालन से जुड़ी 37 अवमानना याचिकाओं पर की। उक्त फैसले में पीठ ने याचिकाकर्ताओं के वेतन का पुनर्निर्धारण, बकाया वेतन का भुगतान और संशोधित पेंशन भुगतान आदेश जारी करने का निर्देश दिया था। चार माह में लाभ न देने पर सात प्रतिशत साधारण ब्याज देने को भी कहा गया था।
याचिकाकर्ताओं ने कहा कि चार साल बीतने के बाद भी रिट अदालत के आदेश का अनुपालन नहीं किया जा रहा है। इससे पहले अदालत राज्य सरकार की ओर से अनुपालन के लिए और समय देने के अनुरोध वाली अर्जी खारिज कर चुकी है।
पीठ ने कहा कि 2022 के आदेश को विशेष अपील में बरकरार रखा गया और 13 जनवरी 2026 को उच्चतम न्यायालय ने भी इसकी पुष्टि कर दी। राज्य की पुनर्विचार याचिकाएं भी खारिज कर दी गई थीं।