ओस्लो/नई दिल्ली, भारतीय मूल की दक्षिण अफ्रीकी विधिवेत्ता नवनेथम ‘नवी’ पिल्लई को वर्ष 2026 का नोबेल शांति पुरस्कार देने की घोषणा की गई है। उन्हें शांति और अंतरराष्ट्रीय कानून को बढ़ावा देने के क्षेत्र में उल्लेखनीय योगदान के लिए इस प्रतिष्ठित सम्मान के लिए चुना गया है।
पिल्लई संयुक्त राष्ट्र की पूर्व मानवाधिकार उच्चायुक्त रह चुकी हैं और अंतरराष्ट्रीय न्यायिक संस्थाओं में भी अहम जिम्मेदारियां निभा चुकी हैं।
23 सितंबर 1941 को दक्षिण अफ्रीका के डरबन में तमिल मूल के भारतीय परिवार में जन्मीं नवी पिल्लई का बचपन रंगभेद के दौर में बीता। नस्लीय भेदभाव और असमानता के माहौल ने उनके जीवन और पेशेवर सफर को गहराई से प्रभावित किया। उन्होंने कानून को अपना करियर बनाया और रंगभेद विरोधी कार्यकर्ताओं का बचाव करने के साथ मानवाधिकारों, समानता तथा न्याय के लिए काम किया।
“I don’t believe it until I hear it from you!”
Listen to an exclusive call with our newest peace laureate Navi Pillay.
Pillay couldn't believe that she had been awarded the 2026 Nobel Peace Prize. Kristian Berg Harpviken, Director of the Norwegian Nobel Institute, was happy to… pic.twitter.com/L1Z2yQR0MU
— The Nobel Prize (@NobelPrize) October 9, 2026
नवी पिल्लई ने वर्ष 1967 में दक्षिण अफ्रीका के नेटाल प्रांत में वकालत शुरू की। वह इस क्षेत्र में वकालत शुरू करने वाली पहली महिला बनीं। आगे चलकर उन्होंने दक्षिण अफ्रीका के उच्च न्यायालय में न्यायाधीश के रूप में भी सेवाएं दीं और देश की न्यायपालिका में महत्वपूर्ण स्थान हासिल किया।
उनका अंतरराष्ट्रीय न्यायिक सफर भी उल्लेखनीय रहा है। उन्होंने रवांडा के लिए अंतरराष्ट्रीय आपराधिक न्यायाधिकरण में न्यायाधीश और अध्यक्ष के रूप में काम किया। इसके बाद वह अंतरराष्ट्रीय आपराधिक न्यायालय की न्यायाधीश बनीं।
वर्ष 2008 से 2014 तक उन्होंने संयुक्त राष्ट्र की मानवाधिकार उच्चायुक्त के रूप में जिम्मेदारी संभाली। अपने कार्यकाल में उन्होंने मानवाधिकारों की रक्षा और अंतरराष्ट्रीय कानून के प्रभावी क्रियान्वयन पर जोर दिया।
नोबेल समिति के अनुसार, पिल्लई ने युद्ध अपराधों, मानवता के विरुद्ध अपराधों और नरसंहार जैसे गंभीर अपराधों के लिए जवाबदेही तय करने में अंतरराष्ट्रीय कानूनी व्यवस्था को मजबूत करने में योगदान दिया है। समिति ने उनके लंबे न्यायिक करियर, साहस और कानून के शासन के प्रति प्रतिबद्धता को सम्मान का आधार बताया है।
वर्ष 2026 में नोबेल पुरस्कारों की शुरुआत के 125 वर्ष पूरे हो रहे हैं। ऐसे समय में नवी पिल्लई को शांति पुरस्कार दिया जाना अंतरराष्ट्रीय कानून, न्यायिक संस्थाओं और मानवाधिकारों के महत्व को रेखांकित करता है।
उनका करियर इस बात का उदाहरण है कि कानून और न्यायिक प्रक्रिया के जरिए भेदभाव, हिंसा और गंभीर अपराधों के खिलाफ जवाबदेही सुनिश्चित करने का प्रयास किया जा सकता है।