नई दिल्ली, कार्यस्थल पर अलग-अलग पीढ़ियों के लोगों के साथ काम करने के दौरान संवाद को लेकर मतभेद बढ़ते नजर आ रहे हैं।
विशेषज्ञों के मुताबिक, यह जरूरी नहीं कि युवा कर्मचारी अपने वरिष्ठों से बेहतर या खराब तरीके से संवाद करते हैं, बल्कि उन्होंने संवाद करना एक ऐसे दौर में सीखा है जो पिछली पीढ़ियों से काफी अलग रहा है।
खासतौर पर जेन जी के कार्यबल में तेजी से शामिल होने के साथ यह अंतर रोजमर्रा की छोटी-छोटी परिस्थितियों में दिखाई देने लगा है। ‘जेन जी’ वे युवा हैं जिनका जन्म 1997 से 2012 के बीच हुआ है।
एक छोटे कैफे और रेस्तरां में काम करने वाली 20 वर्षीय जेन जी कर्मचारी का उदाहरण इस अंतर को आसानी से समझाता है। एक दिन जब उसे लगा कि वह काम पर देर से पहुंचेगी, तो उसने अपने जेन एक्स बॉस को फोन करने के बजाय मैसेज कर दिया। बॉस को यह तरीका पसंद नहीं आया। उनके लिए देर से पहुंचना गंभीर विषय था और वह चाहते थे कि कर्मचारी इस स्थिति में फोन करके जानकारी दे।
दूसरी ओर, कर्मचारी को लगा कि बॉस काफी व्यस्त रहते हैं और फोन करने से उनका समय ज्यादा लगेगा। इसलिए उसके अनुसार मैसेज करना ज्यादा विचारशील तरीका था।
यहां समस्या किसी एक पक्ष के सही या गलत होने की नहीं थी। दोनों के लिए सम्मानजनक संवाद का अर्थ अलग था और दोनों ने अपनी अपेक्षाएं पहले से स्पष्ट नहीं की थीं। ऐसे मामलों में प्रबंधकों के लिए यह जरूरी हो जाता है कि वे कार्यस्थल पर संवाद से जुड़ी अपेक्षाओं को स्पष्ट रूप से बताएं। यदि किसी विशेष परिस्थिति में फोन करना जरूरी है, तो कर्मचारी को इसकी जानकारी पहले से होनी चाहिए।
पीढ़ियों के बीच यह अंतर केवल फोन और मैसेज तक सीमित नहीं है। एक अन्य जेन जी कर्मचारी ने नई नौकरी शुरू करने के बाद अपने प्रबंधक से अपनी चिंता के बारे में बात की। प्रबंधक ने उसकी परेशानी को समझने की कोशिश की, लेकिन उन्हें यह तय करने में असहजता महसूस हुई कि कर्मचारी की निजी स्थिति के बारे में उन्हें कितनी जानकारी होनी चाहिए।
यह अंतर उस सोच से भी जुड़ा है जिसमें पुरानी पीढ़ियों के कई कर्मचारियों ने पेशेवर जीवन और निजी जीवन के बीच स्पष्ट सीमा बनाए रखना सीखा है। दूसरी ओर, जेन जी ऐसे दौर में बड़ी हुई है जिसमें मानसिक स्वास्थ्य और व्यक्तिगत कल्याण पर सार्वजनिक रूप से बातचीत पहले की तुलना में काफी बढ़ी है।
इसलिए किसी कर्मचारी को अपनी व्यक्तिगत परेशानी साझा करना स्वाभाविक लग सकता है, जबकि उसके प्रबंधक को वही जानकारी कामकाजी रिश्ते के संदर्भ में जरूरत से ज्यादा निजी लग सकती है।
जेन जी के संवाद के तरीके को समझने में कोविड-19 महामारी का दौर भी महत्वपूर्ण है। इस पीढ़ी के उम्रदराज सदस्यों में कई ऐसे हैं जिन्होंने कॉलेज, इंटर्नशिप या पहली नौकरी के दौरान महामारी का सामना किया। उस समय आमने-सामने बातचीत की जगह ऑनलाइन संवाद बढ़ गया था और मास्क के कारण आमने-सामने संचार का अनुभव भी बदल गया। अब कृत्रिम बुद्धिमत्ता यानी AI के बढ़ते इस्तेमाल ने संवाद के तरीकों में एक और बदलाव जोड़ दिया है।
जेन जी में 1997 से 2012 के बीच जन्मे लोग शामिल माने जाते हैं। इस पीढ़ी के सदस्य अब धीरे-धीरे कार्यस्थल में बड़ी संख्या में शामिल हो रहे हैं। ऐसे में अलग-अलग पीढ़ियों के कर्मचारियों के बीच संवाद की अपेक्षाओं को समझना महत्वपूर्ण होता जा रहा है।
इस पूरे अंतर का समाधान किसी एक पीढ़ी को सही या गलत साबित करना नहीं है। जरूरत इस बात की है कि कर्मचारी और प्रबंधक एक-दूसरे की संवाद शैली और अपेक्षाओं को स्पष्ट रूप से समझें। फोन, मैसेज, निजी जानकारी साझा करने और पेशेवर सीमाओं जैसे मुद्दों पर पहले से स्पष्ट नियम और बातचीत गलतफहमियों को कम कर सकते हैं।
अलग-अलग पीढ़ियों ने अलग सामाजिक और तकनीकी वातावरण में संवाद करना सीखा है, इसलिए कार्यस्थल पर बेहतर तालमेल के लिए इन अंतर को समझना जरूरी हो सकता है।