गोरखपुर, उत्तर प्रदेश के अधिवक्ताओं के लिए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने बड़ी घोषणा की है। प्रदेश में हाईकोर्ट से लेकर जिला न्यायालयों तक सक्रिय रूप से प्रैक्टिस करने वाले अधिवक्ताओं को अब पांच लाख रुपये प्रति वर्ष तक की कैशलेस चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराने की दिशा में सरकार ने कदम बढ़ाया है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि अधिवक्ताओं की स्वास्थ्य सुरक्षा के लिए बार एसोसिएशन के साथ मिलकर इस व्यवस्था को तैयार किया जाएगा।
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ गोरखपुर सिविल कोर्ट बार एसोसिएशन की नवनिर्वाचित कार्यकारिणी के परिचय समारोह में पहुंचे थे। इसी दौरान उन्होंने अधिवक्ताओं के कल्याण से जुड़ी कई महत्वपूर्ण घोषणाएं कीं।
उन्होंने कहा कि उत्तर प्रदेश में चाहे हाईकोर्ट हो या जिला न्यायालय, सभी सक्रिय रूप से प्रैक्टिस करने वाले अधिवक्ताओं को पांच लाख रुपये प्रतिवर्ष तक कैशलेस मेडिकल इंश्योरेंस की सुविधा उपलब्ध कराने की व्यवस्था की जाएगी।
उत्तर प्रदेश के अंदर हाईकोर्ट हो या डिस्ट्रिक्ट कोर्ट,
सभी सक्रिय प्रैक्टिस करने वाले अधिवक्ताओं को ₹5 लाख प्रति वर्ष कैशलेस की मेडिकल इंश्योरेंस स्कीम की सुविधा उपलब्ध करवाने की आज हम घोषणा कर रहे हैं… pic.twitter.com/6ZHbBVmg0J
— Yogi Adityanath (@myogiadityanath) September 14, 2026
मुख्यमंत्री ने कहा कि अधिवक्ता केवल अदालतों में मुकदमों की पैरवी करने वाला वर्ग नहीं है, बल्कि न्याय व्यवस्था और संविधान की रक्षा में उनकी महत्वपूर्ण भूमिका है। उन्होंने महात्मा गांधी, डॉ. राजेंद्र प्रसाद, सरदार वल्लभभाई पटेल और डॉ. भीमराव आंबेडकर जैसे महान नेताओं के अधिवक्ता होने का उल्लेख करते हुए कहा कि देश के निर्माण में वकीलों की भूमिका बेहद महत्वपूर्ण रही है।
योगी आदित्यनाथ ने कहा कि सरकार अधिवक्ताओं के कल्याण के लिए पहले से कई कदम उठा रही है। अधिवक्ता कल्याण निधि के तहत मिलने वाली सहायता राशि को 1.5 लाख रुपये से बढ़ाकर पांच लाख रुपये किया जा चुका है। इसके अलावा अधिवक्ता कल्याण के लिए 500 करोड़ रुपये का कॉर्पस फंड तैयार किया गया है, जिससे उसके ब्याज से विभिन्न कल्याणकारी योजनाओं को संचालित करने में मदद मिलेगी।
सरकार ने अधिवक्ताओं को मिलने वाली आर्थिक सहायता की अधिकतम आयु सीमा में भी बदलाव किया है। पहले यह सीमा 60 वर्ष थी, जिसे बढ़ाकर 70 वर्ष किया गया है। मुख्यमंत्री के अनुसार अधिवक्ता परिवारों को अब तक बड़ी संख्या में आर्थिक सहायता उपलब्ध कराई जा चुकी है। साथ ही अधिवक्ता भवनों और चैंबर निर्माण के लिए भी सरकार की ओर से सहायता दी जा रही है।
कैशलेस चिकित्सा सुविधा की घोषणा ऐसे समय हुई है जब उत्तर प्रदेश के अधिवक्ताओं के लिए स्वास्थ्य बीमा और मेडिक्लेम सुविधा की मांग लंबे समय से उठती रही है। इससे पहले इलाहाबाद हाईकोर्ट के अधिवक्ताओं की ओर से भी कैशलेस इलाज की मांग को लेकर आवाज उठाई गई थी। अप्रैल 2026 में प्रयागराज में अधिवक्ताओं ने 10 लाख रुपये तक की कैशलेस चिकित्सा सुविधा की मांग को लेकर प्रदर्शन भी किया था।
इस घोषणा से उत्तर प्रदेश में सक्रिय रूप से प्रैक्टिस कर रहे हजारों अधिवक्ताओं को बड़ी राहत मिलने की उम्मीद है। खासतौर पर गंभीर बीमारी या अचानक अस्पताल में भर्ती होने की स्थिति में कैशलेस इलाज की सुविधा अधिवक्ताओं पर पड़ने वाले तत्काल आर्थिक बोझ को कम कर सकती है।