नई दिल्ली, सरकार ने ई-कॉमर्स क्षेत्र में उपभोक्ताओं के हितों की रक्षा और कीमतों में पारदर्शिता बढ़ाने के लिए उपभोक्ता संरक्षण (ई-कॉमर्स) नियम, 2020 में संशोधन किया है। उपभोक्ता मामलों के विभाग के अनुसार, उपभोक्ता संरक्षण (ई-कॉमर्स) (संशोधन) नियम, 2026 एक जनवरी 2027 से लागू होंगे।
नए नियमों के तहत ई-कॉमर्स कंपनियों को किसी उत्पाद पर छूट या कीमत में कटौती दिखाते समय कम की गई कीमत के साथ उसकी ‘पूर्व कीमत’ भी बतानी होगी। पूर्व कीमत से आशय उस कीमत से है, जिस पर छूट की घोषणा से पहले के 30 दिनों में उत्पाद सबसे कम कीमत पर उपलब्ध कराया गया था।
सरकार ने ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म पर खोज परिणामों में हेरफेर को भी प्रतिबंधित किया है। ऐसे तरीके, जिनसे उपयोगकर्ता गुमराह हों या किसी खोज से जुड़े सवाल के लिए परिणामों की प्रासंगिकता प्रभावित हो, अब नियमों के दायरे में आएंगे। इसके अलावा किसी उत्पाद को दूसरे उत्पादों की तुलना में प्राथमिकता से दिखाने वाली Sponsored Listing की पहचान स्पष्ट और प्रमुख रूप से करनी होगी।
ई-कॉमर्स कंपनियों को Dark Patterns यानी ऐसे डिजाइन या कारोबारी तरीकों से बचना होगा, जिनके जरिए उपभोक्ताओं को उनकी इच्छा के विरुद्ध खरीदारी, विकल्प चुनने या किसी निर्णय के लिए प्रभावित या गुमराह किया जाता है। कंपनियों को हर साल अपना स्व-मूल्यांकन करना होगा और अनुपालन प्रमाणपत्र भी प्रदर्शित करना होगा।
संशोधित नियमों के तहत प्रत्येक ई-कॉमर्स कंपनी के लिए राष्ट्रीय उपभोक्ता हेल्पलाइन (NCH) की Convergence प्रक्रिया में भाग लेना भी अनिवार्य होगा। उपभोक्ता मामलों के विभाग के मुताबिक, वर्ष 2025 में राष्ट्रीय उपभोक्ता हेल्पलाइन को कुल 17,71,622 शिकायतें मिलीं, जिनमें 5,11,196 यानी करीब 29 प्रतिशत शिकायतें ई-कॉमर्स क्षेत्र से संबंधित थीं।
नए प्रावधानों के अनुसार, शिकायतकर्ता को शिकायत अधिकारी द्वारा दर्ज की गई शिकायत की एक प्रति उपलब्ध करानी होगी। वहीं, मार्केटप्लेस ई-कॉमर्स कंपनियों को उपभोक्ताओं को ‘Best Before’ या ‘Use Before’ तारीख के साथ रिटर्न, रिफंड, वारंटी, डिलीवरी और भुगतान से संबंधित महत्वपूर्ण जानकारी भी उपलब्ध करानी होगी।
आयातित उत्पादों के मामले में आयातक का विवरण और उत्पाद के मूल देश की जानकारी देना भी जरूरी होगा। इसके अलावा, मार्केटप्लेस ई-कॉमर्स कंपनियां उपभोक्ताओं के व्यक्तिगत विवरण का निर्धारित उद्देश्यों के लिए स्पष्ट और सकारात्मक सहमति के बिना इस्तेमाल नहीं कर सकेंगी।
नियमों में ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म द्वारा आपूर्ति से इतर सेवाओं के लिए एक साथ जोड़कर शुल्क वसूलने पर भी रोक लगाई गई है। हालांकि, लॉयल्टी या सदस्यता कार्यक्रमों को इसका अपवाद रखा गया है।
उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम, 2019 के तहत ई-कॉमर्स क्षेत्र में अनुचित व्यापार व्यवहार से उपभोक्ताओं को बचाने के लिए उपभोक्ता संरक्षण (ई-कॉमर्स) नियम, 2020 अधिसूचित किए गए थे। सरकार का कहना है कि 2026 के संशोधनों का उद्देश्य कारोबार सुगमता बनाए रखने के साथ ई-कॉमर्स व्यवस्था को अधिक पारदर्शी, जवाबदेह और उपभोक्ता-केंद्रित बनाना है।