अयोध्या, श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट की अहम बैठक बुधवार, 2 सितंबर 2026 को अयोध्या में हुई। बैठक में राम मंदिर के प्रशासन को मजबूत करने, वित्तीय व्यवस्था में पारदर्शिता बढ़ाने और ट्रस्ट के रिक्त पदों पर नई नियुक्तियों को लेकर कई महत्वपूर्ण निर्णय लिए गए।
सबसे बड़ा फैसला सेवानिवृत्त एयर मार्शल जितेंद्र मिश्र को राम मंदिर ट्रस्ट का पहला मुख्य कार्यकारी अधिकारी (CEO) नियुक्त करने का रहा।
ट्रस्ट की प्रशासनिक व्यवस्था को और अधिक प्रभावी बनाने के लिए गठित चयन समिति की अनुशंसा के आधार पर जितेंद्र मिश्र के नाम पर मुहर लगाई गई। भारतीय वायुसेना में करीब 39 वर्षों का प्रशासनिक और नेतृत्व अनुभव रखने वाले जितेंद्र मिश्र को सशस्त्र सेनाओं के सर्वोच्च युद्धकालीन सम्मानों में शामिल उत्तम युद्ध सेवा पदक से सम्मानित किया जा चुका है। वह पिछले वर्ष हुए सैन्य अभियान ऑपरेशन सिंदूर के दौरान महत्वपूर्ण नेतृत्वकारी भूमिका में रहे थे।
राम मंदिर के पहले पूर्णकालिक CEO के चयन के लिए गठित समिति ने करीब 5,500 आवेदनों की जांच की और कई चरणों में उम्मीदवारों के साक्षात्कार किए। इसके बाद समिति ने अपनी अनुशंसा ट्रस्ट के सामने रखी, जिस पर बैठक में अंतिम निर्णय लिया गया।
बैठक में ट्रस्ट के सांगठनिक ढांचे में भी महत्वपूर्ण बदलाव किए गए। स्वामी गोविंददेव गिरि जी को ट्रस्ट के महामंत्री की जिम्मेदारी सौंपने का निर्णय लिया गया। ट्रस्ट ने पिछले दो महीनों के दौरान कठिन परिस्थितियों में महामंत्री पद का दायित्व संभालने के लिए श्री कृष्ण मोहन जी के योगदान की सराहना भी की।
इसके साथ ही महेश भागचंदका को ट्रस्ट का नया कोषाध्यक्ष बनाया गया है। 68 वर्षीय महेश भागचंदका व्यवसाय और सामाजिक क्षेत्र से जुड़े हैं। वहीं 74 वर्षीय वरिष्ठ अधिवक्ता मदन मोहन पांडे को नया न्यासी नियुक्त किया गया है। मदन मोहन पांडे 1990 से 2019 तक राम जन्मभूमि मामले में अदालत में पैरवी से जुड़े रहे हैं और उत्तर प्रदेश के पूर्व अतिरिक्त महाधिवक्ता भी रह चुके हैं।
ट्रस्ट में डॉ. निर्मला यादव को भी नए न्यासी के रूप में शामिल किया गया है। 66 वर्षीय डॉ. यादव शिक्षा क्षेत्र से जुड़ी रही हैं और करीब 19 वर्षों तक महाविद्यालय की प्राचार्या के रूप में कार्य कर चुकी हैं। वह विश्वविद्यालय की कार्य परिषद की सदस्य भी रही हैं।
बैठक में राम मंदिर में चढ़ावे की नकदी की गणना व्यवस्था को तकनीक आधारित बनाने पर भी चर्चा हुई। मानवीय हस्तक्षेप कम करने और पारदर्शिता बढ़ाने के लिए आईआईटी तथा दो प्रमुख बैंकों की ओर से दिए गए प्रस्तावों का मूल्यांकन किया जा रहा है। इसका उद्देश्य नकद चढ़ावे की गिनती और लेखा-जोखा प्रक्रिया को अधिक सुरक्षित और पारदर्शी बनाना है।
ट्रस्ट ने वित्त वर्ष 2025-26 के वार्षिक आय-व्यय का विवरण भी बैठक में रखा। प्रस्तुत आंकड़ों के अनुसार इस अवधि में ट्रस्ट की कुल आय करीब 237 करोड़ रुपये रही, जबकि सामान्य मद में करीब 91 करोड़ रुपये खर्च हुए। मंदिर और उससे जुड़े निर्माण कार्यों पर 425 करोड़ रुपये का पूंजीगत व्यय दर्ज किया गया।
वहीं 31 मार्च 2026 तक ट्रस्ट के पास कुल उपलब्ध राशि करीब 1,882 करोड़ रुपये बताई गई है। वित्तीय आंकड़ों और चढ़ावे की गणना में तकनीकी व्यवस्था को लेकर लिए जा रहे फैसले को ट्रस्ट की वित्तीय पारदर्शिता की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।
जितेंद्र मिश्र की नियुक्ति के बाद अब राम मंदिर ट्रस्ट के दैनिक प्रशासन और विभिन्न व्यवस्थाओं के संचालन के लिए एक पूर्णकालिक CEO की भूमिका औपचारिक रूप से स्थापित हो गई है।