हममें से ज्यादातर लोग अपनी मौत के बारे में सोचना पसंद नहीं करते। लेकिन ऐसा करने की एक व्यावहारिक वजह हैः जब व्यक्ति की मृत्यु होती है, तो उसके पीछे छूटी चीज़ों को समेटने और उनका निपटारा करने की जिम्मेदारी किसी और को उठानी पड़ती है।
उन्हें अंतिम संस्कार की व्यवस्था करनी पड़ सकती है, वसीयत तलाशनी पड़ सकती है, बैंकों और पेंशन कोषों से संपर्क करना पड़ सकता है, घर से जुड़े मामले निपटाने पड़ सकते हैं, बिल चुकाने पड़ सकते हैं, बिजली-पानी जैसी सेवाओं और डिजिटल खातों को बंद करना पड़ सकता है और आखिर में छोड़ी गई संपत्ति का बंटवारा करना पड़ सकता है।
और यह सब वे आपके जाने के दुख के बीच कर रहे होंगे।
आप कुछ ऐसे कदम उठा सकते हैं, जिनसे उनका यह बोझ कम हो सके।
वसीयत इतनी जरूरी क्यों है
संपत्ति की अच्छी योजना का मतलब सिर्फ यह तय करना नहीं है कि आपकी रकम और संपत्ति किसे मिलेगी। इसका मकसद यह भी है कि आपके जाने के बाद लोगों के लिए पूरी प्रक्रिया आसान हो।
आप खुद भी वसीयत बना सकते हैं जिसके लिए स्वयं तैयार करने वाली या ऑनलाइन वसीयत की किट उपलब्ध हैं। हालांकि, यह जरूरी है कि आपकी वसीयत आपके राज्य या क्षेत्र के कानूनी नियमों के अनुरूप हो। सरकार भी ऐसी वसीयतों की किसी विशेषज्ञ से जांच कराने की सलाह देती है।
जटिल परिस्थितियों में कानूनी सलाह लेना खास तौर पर जरूरी हो जाता है। मसलन, परिवार में पहले विवाह से हुए बच्चे हों, कारोबार या न्यास हों, किसी के लिए अभिभावकता की व्यवस्था करनी हो या संपत्ति का स्वरूप जटिल हो।
अगर किसी व्यक्ति की बिना वसीयत के मृत्यु होती है तो उसकी संपत्ति सीधे सरकार के पास नहीं चली जाती। ऐसी स्थिति में उसे कानूनी रूप से ‘बिना वसीयत के निधन’ माना जाता है और कानून यह तय करता है कि उसकी संपत्ति किसे और किस क्रम में मिलेगी।
भारत के अलग-अलग राज्यों और क्षेत्रों में इसके नियम अलग हैं।
यह बंटवारा शायद आपकी इच्छा के मुताबिक हो, लेकिन इसकी कोई गारंटी नहीं है। खासकर उन परिवारों में यह बात महत्वपूर्ण हो जाती है, जहां पहले विवाह से हुए बच्चे हों, पारिवारिक रिश्ते जटिल हों या कोई व्यक्ति अपनी संपत्ति दोस्तों, धर्मार्थ संस्थाओं या ऐसे लोगों के नाम करना चाहता हो, जो कानूनी रूप से तय श्रेणियों में नहीं आते।
वसीयत में एक निष्पादक भी नियुक्त किया जाता है। वह आपकी मृत्यु के बाद आपकी संपत्ति और कर्ज से जुड़े मामलों को संभालने तथा वसीयत में लिखे निर्देशों को पूरा करने के लिए जिम्मेदार होता है। इसमें काफी कागजी कार्रवाई, वित्तीय फैसले और सरकारी विभागों तथा वित्तीय संस्थानों से संपर्क करना शामिल हो सकता है।
इसलिए यह सुनिश्चित करना जरूरी है कि जिसे आप यह जिम्मेदारी सौंप रहे हैं, उसे इसकी जानकारी हो और वह यह जिम्मेदारी निभाने के लिए तैयार भी हो।
हर परिवार की स्थिति अलग होती है
हर परिवार में विरासत, संपत्ति और आर्थिक जिम्मेदारियों को लेकर सोच एक जैसी नहीं होती।
कहीं धन और संपत्ति को लेकर अलग-अलग राय हो सकती है, तो कहीं संपत्ति के साथ माता-पिता, बच्चों, भाई-बहनों या दूसरे रिश्तेदारों की जिम्मेदारी निभाने की अपेक्षा भी जुड़ी होती है।
सांस्कृतिक और धार्मिक मान्यताएं भी अंतिम संस्कार, देखभाल की जिम्मेदारियों और संपत्ति के बंटवारे को प्रभावित कर सकती हैं।
परिवार किसी व्यक्ति की मृत्यु के बाद जो होने की उम्मीद करता है और कानून के मुताबिक वास्तव में जो होता है, दोनों हमेशा एक जैसे नहीं होते।
मौत के बारे में बात करने को लेकर भी अलग-अलग संस्कृतियों में सहजता का स्तर अलग हो सकता है। अगर आपके फैसले परिवार के लिए चौंकाने वाले हो सकते हैं तो उनके बारे में आपके जीवित रहते बात कर लेना मददगार हो सकता है।
पेंशन कोष का भी रखें ध्यान
बहुत से लोगों को यह पता नहीं होता कि वसीयत बना लेने से उनकी हर संपत्ति के बारे में व्यवस्था अपने आप नहीं हो जाती। पेंशन कोष इसका एक अच्छा उदाहरण है।
आपकी पेंशन राशि अपने आप आपकी संपत्ति का हिस्सा नहीं बनती। आपके पेंशन कोष के अपने नियम होते हैं, जो यह तय करते हैं कि आपकी मृत्यु के बाद का लाभ किसे मिलेगा। इसमें आपके खाते की रकम के साथ-साथ कोष के जरिए मिली बीमा राशि भी शामिल हो सकती है।
आपकी परिस्थितियों के आधार पर मृत्यु के बाद मिलने वाले लाभ के लिए किया गया वैध और बाध्यकारी नामांकन कोष के प्रबंधक को आपकी पेंशन किसी पात्र लाभार्थी को देने का निर्देश दे सकता है।
इसलिए यह मानकर न चलें कि आपकी वसीयत में पेंशन भी शामिल है। अपने पेंशन कोष में दर्ज लाभार्थी के नाम की समय-समय पर जांच करते रहें।
कुछ छोटे लेकिन जरूरी कदम
ऐसे कई और काम हैं, जिनसे आप अपने परिवार के लिए आगे की प्रक्रिया आसान बना सकते हैं।
सोचिए कि अगर आपकी गैरमौजूदगी में किसी को आपकी पूरी वित्तीय स्थिति का पता लगाना पड़े तो उसके लिए यह कितना मुश्किल होगा। क्या उसे पता होगा कि आपकी वसीयत कहां रखी है? आपका वकील कौन है? आपके गृह ऋण का खाता किस बैंक में है? आपकी पेंशन कहां जमा है? आपके पास शेयर, बीमा या डिजिटल मुद्रा है या नहीं? कौन-से बिल और सदस्यता शुल्क अपने आप खाते से कटते हैं?
इस जानकारी का एक सुरक्षित रिकॉर्ड रखना उपयोगी हो सकता है। इसे किसी सुरक्षित स्थान पर रखी भौतिक फाइल या सुरक्षित तरीके से रखी गई डिजिटल फाइल के रूप में रखा जा सकता है। इसमें आपके वसीयत के निष्पादक, वकील, लेखाकार और वित्तीय सलाहकार की जानकारी के साथ प्रमुख बैंक खातों, निवेश, कर्ज, बीमा पॉलिसी और महत्वपूर्ण डिजिटल संपत्तियों का विवरण दिया जा सकता है।
आपकी डिजिटल जिंदगी के बारे में भी यही बात लागू होती है। आपकी मृत्यु के बाद किसी को ईमेल, सोशल मीडिया, तस्वीरों और ऑनलाइन भंडारण जैसी सेवाओं के खाते बंद करने पड़ सकते हैं।
पासवर्ड की कागज या डिजिटल सूची रखने के बजाय किसी भरोसेमंद पासवर्ड प्रबंधक का इस्तेमाल किया जा सकता है। यह पासवर्ड को कूटबद्ध और सुरक्षित भंडार में रखता है।
हालांकि, संबंधित व्यक्ति को यह जरूर पता होना चाहिए कि ऐसा पासवर्ड प्रबंधक मौजूद है और अधिकृत तरीके से उस तक पहुंच कैसे बनाई जा सकती है। उसे हर खाते में सीधे प्रवेश की जरूरत शायद न हो, लेकिन यह जानकारी जरूर होनी चाहिए कि आपके कौन-कौन से खाते हैं और शुरुआत कहां से करनी है।
परिवार से इस बारे में बात करें
आखिर में, अपने परिवार से इन विषयों पर बात करें—खासकर तब, जब विरासत, अंतिम संस्कार या आर्थिक जिम्मेदारियों को लेकर आपके फैसले परिवार की सांस्कृतिक, धार्मिक या पारिवारिक अपेक्षाओं से अलग हों।
आप अपने चाहने वालों के लिए अपनी मौत का दुख कम नहीं कर सकते, लेकिन उसके बाद की आर्थिक और जरूरी कागजी कार्रवाई को काफी आसान जरूर बना सकते हैं।










