सावन पूर्णिमा के पावन अवसर पर अयोध्या में आस्था का सैलाब देखने को मिला। गुरुवार सुबह से ही बड़ी संख्या में श्रद्धालु सरयू नदी के घाटों पर पहुंचने लगे। लोगों ने सरयू में आस्था की डुबकी लगाई और भगवान शिव की पूजा-अर्चना कर सुख-समृद्धि और निरोगी जीवन की कामना की।
सावन का महीना भगवान शिव की आराधना के लिए विशेष माना जाता है। पूरे महीने शिव भक्त मंदिरों में पहुंचकर भगवान भोलेनाथ का जलाभिषेक करते हैं।
सावन पूर्णिमा इस धार्मिक माह का महत्वपूर्ण पड़ाव है। अयोध्या में भी इस दिन श्रद्धालुओं ने सरयू स्नान के बाद मंदिरों में जाकर पूजा-पाठ किया और शिवलिंग पर जल अर्पित किया।
एक पुजारी ने बात करते हुए बताया कि सावन पूर्णिमा का दिन भक्तों के लिए विशेष महत्व रखता है। उन्होंने कहा कि पिछले एक महीने से श्रद्धालु भगवान भोलेनाथ को जल चढ़ा रहे हैं, जलाभिषेक कर रहे हैं और शिव की आराधना में जुटे हैं।
मान्यता है कि सावन में श्रद्धा और विधि-विधान से भगवान शिव का जलाभिषेक करने से भक्तों की मनोकामनाएं पूरी होती हैं और जीवन में सुख-शांति आती है।
उन्होंने कहा कि सावन पूर्णिमा के दिन धार्मिक आस्था के साथ रक्षाबंधन का त्योहार भी मनाया जाता है। भाई-बहन के प्रेम और विश्वास का यह पर्व देशभर में उत्साह के साथ मनाया जाता है। पौराणिक मान्यताओं में राजा बलि और माता लक्ष्मी से जुड़ी कथा भी इस दिन से जोड़ी जाती है। इस दिन माता लक्ष्मी ने गरीब स्त्री का वेश धारण कर राजा बलि को राखी बांधी थी।
उधर, बिहार के बांका में भी सावन पूर्णिमा के मौके पर श्रद्धालुओं की भारी भीड़ देखने को मिली। प्रसिद्ध मंदिर में बड़ी संख्या में भक्त भगवान शिव को जल चढ़ाने पहुंचे।
सुबह से ही मंदिर परिसर में श्रद्धालुओं का आना-जाना लगा रहा। भक्तों ने भगवान भोलेनाथ का जलाभिषेक कर परिवार की सुख-शांति और समृद्धि की प्रार्थना की।









