नांदेड़, शिरोमणि अकाली दल (शिअद) प्रमुख एवं पंजाब के पूर्व उपमुख्यमंत्री सुखबीर सिंह बादल बृहस्पतिवार को महाराष्ट्र के नांदेड़ में कृपाण से किए गए हमले में घायल हो गए।
नांदेड़ के पुलिस अधीक्षक (एसपी) नीलाभ रोहन ने कहा, एक निहंग ने गुरुद्वारे के अंदर बादल पर कृपाण से हमला किया। उन्होंने कहा कि हमलावर को हिरासत में ले लिया गया है।
एक अधिकारी ने बताया कि बादल को तुरंत अस्पताल ले जाया गया, जहां उनके दाहिने हाथ में दो-तीन टांके लगाए गए। उन्होंने बताया कि उनकी हालत खतरे से बाहर है। उन्होंने कहा कि विशेष सुरक्षा इकाई में तैनात पुलिस अधिकारी संतोष केंद्रे बादल को बचाने के प्रयास में घायल हो गये।
बादल पर दोपहर लगभग एक बजकर 45 मिनट पर गुरुद्वारा माता साहिब देवान जी मुगत के अंदर हमला किया गया।
इससे पहले दिन में, बादल अकाली दल की सांसद एवं अपनी पत्नी हरसिमरत कौर बादल के साथ नांदेड़ स्थित तख्त श्री हजूर साहिब गए थे।
एक अधिकारी ने बताया कि महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने बादल पर हुए हमले की जांच के आदेश दिए हैं। उन्होंने कहा कि फडणवीस ने बादल को फोन कर उनके स्वास्थ्य के बारे में जानकारी ली।
सूत्रों ने बताया कि फडणवीस ने नांदेड़ के पुलिस अधीक्षक से घटना के बारे में जानकारी ली और पुलिस को हमले की वजह की जांच करने का निर्देश दिया।
भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के वरिष्ठ नेता आर. पी. सिंह ने बादल पर हुए हमले की कड़ी निंदा की और कहा कि हिंसा का ऐसा कृत्य पूरी तरह अस्वीकार्य है। उन्होंने फडणवीस से इस घटना की पूरी और निष्पक्ष जांच सुनिश्चित करने की अपील की।
सिंह ने ‘एक्स’ पर एक पोस्ट में कहा, ‘‘मैं नांदेड़ में सुखबीर सिंह बादल जी पर हुए हमले की कड़ी निंदा करता हूं। हिंसा का ऐसा कृत्य पूरी तरह अस्वीकार्य है और लोकतांत्रिक समाज में इसकी कोई जगह नहीं है। राजनीतिक मतभेद और असहमतियां लोकतंत्र का स्वाभाविक हिस्सा हैं, लेकिन हिंसा का सहारा लेना कभी भी उचित नहीं ठहराया जा सकता।
यह पहली बार नहीं है जब बादल किसी हमले में बाल-बाल बचे हैं। दिसंबर 2024 में बब्बर खालसा इंटरनेशनल के एक पूर्व आतंकवादी ने अमृतसर के स्वर्ण मंदिर के प्रवेश द्वार पर बादल पर गोली चला दी थी।
उस व्यक्ति की पहचान नारायण सिंह चौरा के रूप में हुई थी। मौके पर मौजूद लोगों ने उसे काबू कर पुलिस के हवाले कर दिया था।
उस समय बादल पंजाब में शिअद सरकार द्वारा 2007 से 2017 तक की गई ‘‘गलतियों’’ के लिए ‘तनखैया’ (धार्मिक सजा) घोषित किए जाने के बाद सेवा कर रहे थे।









