अयोध्या में श्रीराम जन्मभूमि मंदिर परिसर में आने वाले देश-विदेश के रामभक्तों के लिए इन दिनों एक बेहद सुखद और राहत भरी व्यवस्था संचालित की जा रही है। श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट ने वर्तमान परिस्थितियों को देखते हुए परिसर के भीतर स्थित सभी प्रमुख और पूरक मंदिरों में दर्शन करने के लिए पास (Pass) की अनिवार्य बाध्यता को पूरी तरह से समाप्त कर दिया है।
अब रामनगरी पहुंचने वाले आम और खास सभी श्रद्धालु अपनी इच्छानुसार और मनचाहे ढंग से न केवल मुख्य रामलला दरबार, बल्कि परकोटे के 7 पूरक मंदिरों और नवनिर्मित 7 ऋषियों-मुनियों (सप्तर्षि) के मंदिरों में भी बिना किसी रोक-टोक के सुगमता से दर्शन-पूजन कर पा रहे हैं।
वर्तमान व्यवस्था के तहत, हालांकि पासधारक और बिना पास वाले सामान्य श्रद्धालुओं को परिसर के भीतर अलग-अलग प्रवेश मार्गों (एंट्री पॉइंट) से प्रवेश दिया जा रहा है और उनकी निकासी (एग्जिट) की राहें भी भिन्न-भिन्न तय की गई हैं, ताकि सुरक्षा और कतार प्रबंधन सुचारू बना रहे। परंतु, ट्रस्ट ने साफ किया है कि यह खुली छूट और व्यवस्था अधिक दिनों तक स्थायी नहीं रहने वाली है।
जैसे ही राम मंदिर में आने वाले दर्शनार्थियों की दैनिक संख्या 1,00,000 या इससे अधिक होने लगेगी, वैसे ही ट्रस्ट अपनी पुरानी पास व्यवस्था को तत्काल प्रभाव से दोबारा कड़ाई से लागू कर देगा। उस स्थिति में केवल सुगम, विशिष्ट, नित्य और सामान्य पासधारकों को ही तय नियमानुसार अलग-अलग श्रेणी के मंदिरों में प्रवेश व दर्शन का अधिकार मिल सकेगा।
इस महत्वपूर्ण व्यवस्था और बदलाव पर विस्तृत प्रकाश डालते हुए श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के वरिष्ठ सदस्य डॉ. अनिल कुमार मिश्र ने बताया कि इन दिनों अयोध्या और आसपास के क्षेत्रों में रिकॉर्ड तोड़ भीषण गर्मी और लू का प्रकोप चल रहा है। इस चिलचिलाती धूप के कारण सुदूर राज्यों और ग्रामीण अंचलों से आने वाले श्रद्धालुओं की दैनिक संख्या सामान्य दिनों की तुलना में अपेक्षाकृत थोड़ी कम दर्ज की जा रही है।
वर्तमान में किसी-किसी विशेष दिन (जैसे वीकेंड) पर ही दर्शनार्थियों का आंकड़ा 1,00,000 की संख्या को पार कर रहा है। यही वजह है कि जब तक भीड़ नियंत्रण में है, तब तक प्रशासन और ट्रस्ट बेहद आसानी से परिसर के सभी छोटे-बड़े मंदिरों में भक्तों को निर्बाध भ्रमण करा रहा है।
डॉ. मिश्र ने भविष्य की कार्ययोजना को स्पष्ट करते हुए चेतावनी भरे लहजे में कहा कि जैसे ही मौसम अनुकूल होगा और श्रद्धालुओं का रेला बढ़ने लगेगा, तब सभी दर्शनार्थियों को परिसर के भीतर बने प्रत्येक मंदिर में एक साथ ले जाना सुरक्षा और व्यवस्था के दृष्टिकोण से संभव नहीं होगा।
ऐसे में परिसर के भीतर किसी भी प्रकार की भगदड़ या अप्रिय स्थिति से बचने के लिए पूर्व निर्धारित पास व्यवस्था को पुनः लागू करना ही सबसे श्रेयस्कर और सुरक्षित विकल्प होगा।
पुरानी व्यवस्था बहाल होने के बाद, सुगम, विशिष्ट और नित्य पास रखने वाले वीआईपी (VIP) श्रद्धालुओं को रामलला व राम परिवार के अतिरिक्त केवल परकोटे के भीतर बने 6 मंदिरों में प्रवेश मिल सकेगा।
वहीं, सामान्य पास रखने वाले आम दर्शनार्थियों को राम परिवार के साथ-साथ शेषावतार मंदिर, सप्तर्षि मंदिर और ऐतिहासिक कुबेर टीले पर स्थित शिव मंदिर के दर्शन सुलभ कराए जाएंगे।
ट्रस्ट के सदस्य ने एक व्यावहारिक तथ्य साझा करते हुए बताया कि भले ही वर्तमान में सभी मंदिरों के लिए खुली छूट प्रदान कर दी गई है, फिर भी सप्तर्षि (सात ऋषियों) के मंदिरों की ओर जाने वाले श्रद्धालुओं की संख्या काफी कम देखी जा रही है।
इसका मुख्य कारण यह है कि मुख्य भव्य परकोटे का पैदल भ्रमण करते-करते सुदूर से आए श्रद्धालु और बुजुर्ग पूरी तरह थक जाते हैं और मुख्य परिसर से सप्तर्षि मंदिरों की भौतिक दूरी थोड़ी अधिक है। वर्तमान में यदि कोई श्रद्धालु परिसर में बने सभी मंदिरों के पूरी तरह दर्शन करना चाहता है, तो उसे आराम से लगभग 1 से 2 घंटे का समय लग रहा है।










