पीलीभीत जिले में माल एवं सेवा कर (जीएसटी) आईडी के कथित दुरुपयोग से जुड़ी लगभग सात करोड़ रुपये की धोखाधड़ी का खुलासा करते हुए पुलिस ने कथित तौर पर फर्जी बिल बनाने के लिए इस्तेमाल की जाने वाली 13 फर्जी फर्मों का पता लगाया।
पुलिस के अनुसार, आरोपियों ने बैंक ऋण की व्यवस्था करने के बहाने एक स्थानीय व्यवसायी को धोखा दिया और धोखाधड़ी वाले लेनदेन को अंजाम देने के लिए उसकी जीएसटी से जुड़़ी गोपनीय जानकारी जुटाई।
कोतवाली प्रभारी सत्येन्द्र कुमार ने बताया कि पीड़ित की शिकायत के आधार पर मामला दर्ज कर विस्तृत जांच की जा रही है।
शिकायतकर्ता मोहल्ला छोटा खुदागंज निवासी और शाहजी इंटरप्राइजेज के मालिक मोहम्मद नईम ने कहा कि वह हैंडपंप स्थापना और श्रम सेवा व्यवसाय चलाता है। नईम ने शिकायत में आरोप लगाया कि अजमल उर्फ समीर राणा ने एक ऋण एजेंट के रूप में उनसे संपर्क किया और उन्हें ऋण प्रक्रिया के हिस्से के रूप में 12 जनवरी, 2026 को अपनी जीएसटी आईडी, पासवर्ड और आधार विवरण साझा करने के लिए राजी किया।
शिकायतकर्ता ने बताया कि यह धोखाधड़ी 13 मार्च को तब सामने आई, जब जीएसटी विभाग के अधिकारियों ने नईम से संपर्क किया और उन्हें बताया कि बिना रिटर्न दाखिल किए उनकी जीएसटी आईडी के तहत लगभग सात करोड़ रुपये की खरीदारी दिखाई गई है।
पुलिस ने जांच के दौरान पाया कि नरेंद्र कुमार यादव ‘एस एंटरप्राइजेज’ और देवरात सिंह ‘देव एंटरप्राइजेज’ सहित लगभग 13 फर्जी फर्मों के नाम पर फर्जी चालान तैयार किए गए थे।
पुलिस के मुताबिक, नईम ने जब आरोपियों का विरोध किया तो उससे दुर्व्यवहार किया गया और गंभीर परिणाम भुगतने की धमकी दी गई। पुलिस ने बताया कि संबंधित धाराओं के तहत प्राथमिकी दर्ज कर ली गई है और जांच जारी है।




