दिल्ली में आयोजित ‘अयोध्या पर्व’ के दौरान दिए गए एक भाषण ने सियासी और सामाजिक हलकों में चर्चा तेज कर दी है। यह कार्यक्रम पूर्व सांसद लल्लू सिंह द्वारा आयोजित किया गया था, जिसमें अयोध्या के प्रख्यात विद्वान आचार्य मिथिलेश नंदिनी शरण ने शहर की मौजूदा व्यवस्था पर खुलकर अपनी बात रखी।
अपने संबोधन में आचार्य शरण ने कहा, “ये अयोध्या एक धोखा है। उन्होंने अयोध्या के धार्मिक स्थलों और घाटों के बदलते स्वरूप पर नाराजगी जताते हुए कहा कि राम की पैड़ी जैसे पवित्र स्थल अब आस्था के बजाय वेडिंग शूट और सोशल मीडिया रील बनाने का केंद्र बनते जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि “भला आदमी आधा घंटा भी वहां ठहर नहीं सकता।
आचार्य ने अयोध्या के हाईवे पर स्थापित भगवान हनुमान और महर्षि वाल्मीकि की प्रतिमाओं की स्थिति पर भी सवाल उठाए। उनका कहना था कि ये प्रतिमाएं बिना किसी समुचित संरक्षण के खुले में धूल और प्रदूषण झेल रही हैं, जो आस्था के प्रति उपेक्षा को दर्शाता है।
उन्होंने धार्मिक प्रतीकों के “सजावटी इस्तेमाल” पर भी आपत्ति जताई और कहा कि देवी-देवताओं को प्रतीक मात्र बनाकर प्रस्तुत किया जा रहा है। इसके अलावा, शहर में लगाए जा रहे बाहरी प्रजाति के पेड़ों—जैसे पॉम ट्री—पर सवाल उठाते हुए उन्होंने कहा कि अयोध्या की पारंपरिक वनस्पति को नजरअंदाज किया जा रहा है।
आर्थिक पहलुओं पर भी टिप्पणी करते हुए आचार्य ने आरोप लगाया कि विकास कार्यों में अनावश्यक खर्च किया जा रहा है, जबकि उनकी देखरेख पर भी अतिरिक्त धन खर्च हो रहा है।
सबसे गंभीर चिंता जताते हुए उन्होंने कहा कि अयोध्या की पारंपरिक रामायण कथा-वाचन परंपरा लगभग समाप्त हो चुकी है। “इस अयोध्या में रामायणियों की कथा परंपरा शून्य हो गई है,” उन्होंने कहा।
शास्त्रों में अयोध्या को “अयोध्य” यानी अजेय नगर बताया गया है। इसी संदर्भ में आचार्य ने व्यंग्य करते हुए कहा कि “जिस अयोध्या को दुनिया नहीं जीत सकी, उसे आज के ठेकेदारी तंत्र ने हरा दिया।
इस बयान के सामने आने के बाद अयोध्या के विकास, धार्मिक स्वरूप और सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण को लेकर नई बहस छिड़ गई है।




