ज्योतिष और धार्मिक दृष्टि से चंद्र ग्रहण को बहुत महत्वपूर्ण माना जाता है। धर्म शास्त्रों में इसे केतु से जोड़ा गया है। वहीं खगोल विज्ञान के अनुसार, चंद्र ग्रहण पृथ्वी, सूर्य और चंद्रमा की विशेष स्थिति का परिणाम होता है। चंद्र ग्रहण हमेशा पूर्णिमा की तिथि पर ही लगता है। इस साल फाल्गुन माह की पूर्णिमा के दिन चंद्र पर ग्रहण लगेगा।
होलिका दहन और होली के समय ग्रहण
फाल्गुन पूर्णिमा के दिन हर साल किया जाता है और अगले दिन रंगों के साथ होली मनाई जाती है। इस साल 3 मार्च को फाल्गुन मास की पूर्णिमा है। इस दिन चंद्र ग्रहण भारत में दिखाई देगा और इसका सूतक काल भी मान्य होगा। यह होलिका दहन पर ग्रस्तोदय रूप में नजर आएगा, यानी जब चंद्रमा उदित होंगे तब तक ग्रहण लग चुका होगा।
इस साल का चंद्र ग्रहण दोपहर 3 बजकर 20 मिनट पर शुरू होगा और शाम 6 बजकर 47 मिनट तक रहेगा। यह साल का सबसे लंबा चंद्र ग्रहण है और इसकी कुल अवधि 3 घंटे 27 मिनट होगी। इस समय चंद्रमा सिंह राशि और पूर्वा फाल्गुनी नक्षत्र में होंगे।
भारत में यह चंद्र ग्रहण ग्रस्तोदय रूप में नजर आएगा। इसका मतलब है कि भारत में चंद्रमा के उदित होते ही ग्रहण शुरू मानी जाएगी। भारत में इसका प्रारंभ और मध्य हिस्सा सीधे तौर पर दिखाई नहीं देगा, केवल चंद्रमा के उदित होने के समय से ही ग्रहण का दृश्य दिखेगा।
भारत में चंद्रोदय शाम 6 बजकर 22 मिनट पर होगा। वहीं चंद्र ग्रहण की समाप्ति शाम 6 बजकर 47 मिनट पर होगी। इसका मतलब है कि भारत में यह ग्रहण केवल 25 मिनट तक ही दिखाई देगा। अलग-अलग स्थानों पर चंद्रोदय का समय थोड़ा भिन्न हो सकता है, इसलिए ग्रहण का दृश्य स्थानीय समय के अनुसार अलग-अलग जगहों पर अलग दिखाई देगा।




