अयोध्या में जीएसटी के डिप्टी कमिश्नर प्रशांत कुमार सिंह ने अपना इस्तीफा वापस ले लिया है। यह मामला बीते कुछ दिनों से सुर्खियों में था, जब उन्होंने शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद के बयानों से आहत होकर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के समर्थन में 27 जनवरी 2026 को इस्तीफा दिया था।
अब प्रशांत कुमार सिंह ने अपना निर्णय बदलते हुए इस्तीफा वापस ले लिया है। इस घटनाक्रम ने प्रशासनिक हलकों और राजनीतिक चर्चाओं में नई हलचल पैदा कर दी है। इस्तीफा देने और फिर वापस लेने की वजह से यह मामला लगातार चर्चा का विषय बना हुआ है।
#WATCH | अयोध्या, उत्तर प्रदेश: अयोध्या राज्य कर विभाग के उपायुक्त प्रशांत कुमार सिंह ने कहा, "…मैंने अपने त्यागपत्र को वापस ले लिया है… मुझ पर कोई दबाव नहीं है। बिना किसी दबाव से मैंने अपना इस्तीफा वापस लिया है… आज मैं अपने कार्यालय में हूं और अपना कार्य कर रहा हूं… मेरे… pic.twitter.com/mpF79B05Zf
— ANI_HindiNews (@AHindinews) January 31, 2026
अपने भाई विश्वजीत सिंह पर लगाए गंभीर आरोप
इसी दौरान उन्होंने मेरे भाई (विश्वजीत सिंह) मुख्तार अंसारी की मऊ गैंग के सक्रिय सदस्य हैं और उनके आर्थिक सलाहकार रहे हैं। उनके ऊपर तमाम आपराधिक मुकदमें दर्ज हैं, उस (विश्वजीत सिंह) व्यक्ति ने अपने माता-पिता को मारा पीटा, जिसके संबंध में FIR दर्ज है। उन्होंने JIO ब्रांच मैनेजर को भी जान से मारने की धमकी दी, ये व्यक्ति जबरन वसूली करता है, उनका काम है कि पैसों के लिए दबाव बनाना, वे एक आपराधिक व्यक्ति हैं।
फर्जी दिव्यांग सर्टिफिकेट मामले पर उन्होंने कहा, उन्होंने (विश्वजीत सिंह) साल 2021 में CMO मऊ को एक प्रार्थना पत्र दिया कि प्रशांत कुमार सिंह ने जो (दिव्यांग) प्रमाणपत्र दिया है वो फर्जी है क्योंकि उस पर दिन अंकित नहीं है और उस पर डॉक्टरों के हस्ताक्षर नहीं है।
CMO मऊ ने उसके (विश्वजीत सिंह) द्वारा बनाए गए फर्जी प्रमाणपत्र को संज्ञान में नहीं लिया बल्कि सीधे-सीधे मुझे जांच के लिए आदेश दिए। जबकि उनके (CMO मऊ) ही कार्यालय से मुझे प्रमाणपत्र जारी किया गया था, CMO को चाहिए था कि वे जांच लेते कि प्रमाणपत्र जारी है या नहीं?
मैं मुख्य चिकित्सा अधिकारी अयोध्या के सामने प्रस्तुत हुआ और मुख्य चिकित्सा अधिकारी अयोध्या ने CMO मऊ से पूछा कि ये प्रमाणपत्र सही है या नहीं। जिसके जवाब में CMO साहब लिख कर बताते हैं कि प्रमाणपत्र सही है। मैं पूछना चाहता हूं कि फिर बार-बार मेरे प्रमाणपत्र को फर्जी क्यों बताया जा रहा है?










