लखनऊ, मुख्यमंत्री कृषक दुर्घटना कल्याण बीमा योजना के अंतर्गत क्लेम दाखिल करने की समय-सीमा को लेकर एक अहम फैसला सामने आया है। इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ पीठ ने केवल देरी के आधार पर खारिज किए गए बीमा क्लेम को अनुचित मानते हुए संबंधित समिति के आदेश को रद्द कर दिया है और मामले पर दोबारा सभी पहलुओं पर विचार कर नया आदेश पारित करने का निर्देश दिया है।
यह आदेश माननीय न्यायमूर्ति शेखर बी. सराफ एवं माननीय न्यायमूर्ति मंजिव शुक्ला की खंडपीठ द्वारा पारित किया गया। मामला रिट-सी संख्या 12383/2025 (अमरीन बानो बनाम उत्तर प्रदेश राज्य व अन्य) से संबंधित है।
याची अमरीन बानो ने अपने परिजन की दुर्घटनावश मृत्यु के बाद मुख्यमंत्री कृषक दुर्घटना बीमा योजना के अंतर्गत बीमा क्लेम दाखिल किया था। योजना के नियमों के अनुसार—
दुर्घटना की तारीख से 45 दिन के भीतर क्लेम दाखिल किया जाना चाहिए, विलंब की स्थिति में 30 दिन की अतिरिक्त अवधि जिलाधिकारी/मजिस्ट्रेट के विवेकाधिकार पर बढ़ाई जा सकती है, इस प्रकार अधिकतम 75 दिनों के भीतर क्लेम दाखिल किया जाना अपेक्षित है
हालांकि इस मामले में याची द्वारा क्लेम 82 दिनों के बाद दाखिल किया गया, जिसके चलते संबंधित समिति ने 17 अक्टूबर 2023 को आदेश पारित करते हुए क्लेम को केवल देरी के आधार पर खारिज कर दिया।
समिति द्वारा क्लेम खारिज किए जाने के बाद याची ने इसे संविधान के अनुच्छेद 226 के तहत उच्च न्यायालय में चुनौती दी। याची की ओर से अधिवक्ता अभिनव श्रीवास्तव ने पक्ष रखा, जबकि राज्य सरकार की ओर से मुख्य स्थायी अधिवक्ता (CSC) उपस्थित रहे।
याची के अधिवक्ता अभिनव श्रीवास्तव ने अदालत के समक्ष विस्तृत बहस करते हुए कहा कि—
यह योजना एक कल्याणकारी (Beneficial) योजना है, केवल तकनीकी देरी के आधार पर गरीब किसान परिवार को योजना के लाभ से वंचित नहीं किया जा सकता, योजना में यह स्पष्ट नहीं किया गया है कि समय सीमा का उल्लंघन होने पर क्लेम स्वतः खारिज कर दिया जाएगा। समिति ने याची द्वारा देरी के लिए बताए गए कारणों पर कोई विचार नहीं किया।
अधिवक्ता अभिनव श्रीवास्तव ने हाईकोर्ट के पूर्व के महत्वपूर्ण निर्णयों पर भरोसा जताया, विशेष रूप से—
सर्वेश देवी बनाम उत्तर प्रदेश राज्य और गौतम यादव बनाम उत्तर प्रदेश राज्य (2020 (11) ADJ 321)
इन मामलों में हाईकोर्ट की खंडपीठ ने यह माना था कि 75 दिनों की सीमा अत्यधिक संकीर्ण, अव्यावहारिक और मनमानी है तथा बीमा जैसे कल्याणकारी मामलों में लंबी अवधि दी जानी चाहिए।
खंडपीठ ने अपने आदेश में स्पष्ट शब्दों में कहा कि—
“यह योजना एक कल्याणकारी योजना है और इसमें समय-सीमा को यांत्रिक रूप से लागू नहीं किया जा सकता। यदि याची द्वारा देरी के लिए उचित कारण दर्शाया गया है, तो उस पर विचार किया जाना अनिवार्य है।”
कोर्ट ने यह भी कहा कि समिति ने याची की ओर से प्रस्तुत देरी के कारणों पर विचार किए बिना केवल यह कहकर क्लेम खारिज कर दिया कि आवेदन 82 दिन में दाखिल किया गया, जो न्यायसंगत नहीं है।




