अयोध्या, राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ ने अपनी १०० वर्षों की यात्रा पूरी करते हुए शताब्दी वर्ष का प्रारंभ किया। अयोध्या के राम कथा पार्क में संघ ने अपना स्थापना दिवस विजयादशमी उत्सव के रूप में मनाया।
इसी दिन एक सामर्थ्यवान राष्ट्र के रूप में भारत को परम वैभव पर ले जाने हेतु डॉक्टर केशव बलिराम हेडगेवार जी ने 27 सितम्बर सन् 1925 में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ का कार्य प्रारंभ किया था।
ध्वजारोहण के साथ मुख्य अतिथि राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सरकार्यवाह मा. दत्तात्रेय होसबाले जी ने शस्त्र पूजन कर भगवान राम के चित्र के समक्ष दीप प्रज्ज्वलित कर पूजन अर्चन किया।
कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए भगवान श्री ऋषभ देव जन्मभूमि दिगम्बर जैन तीर्थ अयोध्या के पीठाधीश पूज्यसंत रवींद्र कीर्ति स्वामी जी ने कहा कि अयोध्या में राम मंदिर का निर्माण संघ के वर्षों के संघर्ष का परिणाम है। संघ वैदिक, सनातन संस्कृति के मूल मंत्र अहिंसा परमो धर्मः का पालन करने वाला संगठन है।
इस मौके पर हजारों की संख्या में उपस्थित स्वयंसेवकों ,समाज बन्धुओं तथा अयोध्या के पूज्य संतों के बीच मुख्य अतिथि राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सरकार्यवाह मा. दत्तात्रेय होसबाले जी ने अपने संबोधन में कहा कि विजयादशमी धर्म स्थापना का मंगल उत्सव है। अधर्म पर धर्म की, अन्याय पर न्याय की, असत्य पर सत्य की जीत की कामना करते हैं।
राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ अपने अद्भुत प्रेरणादाई यात्रा के सौ वर्ष पूर्ण करते हुए अपने शताब्दी वर्ष में प्रवेश कर रहा है। आज देश के किसी भी सीमा के अंतिम गांव में संघ की शाखा लगती है। संघ के स्वयंसेवक देश व विदेशों में भी रहकर मानवता की सेवा में निरंतर कार्य कर रहे हैं। यहां कई पंथ संप्रदाय हैं जो सब हिन्दू धर्म के ही कार्य कर रहे हैं।
बुद्ध, जैन, सिख सब के एक ईश्वर हैं। हिंदुत्व समन्वय का विचार है। रामराज्य और हिंदू राष्ट्र अलग अलग नहीं है। प्रभु राम केवल भारत भूमि के नहीं बल्कि समस्त मानव जाति के लिए आदर्श हैं। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ समाज को एक ध्येय मार्ग पर संगठित करने का संकल्प लेकर कार्य कर रहा है।
स्वार्थी हिंदू को सेवाभावी हिंदू बनाओ। अकर्मण्य हिन्दू को पुरुषार्थ वाला बनाओ। बिखरे हुए हिंदू को संगठित हिन्दू बनाओ।
राष्ट्रभक्ति, सेवा, अनुशासन के मार्ग पर चलते हुए, देश सेवा के लिए सामने आएं, कमजोर दुर्बल के जीवन को सार्थक बनाने के लिए संघ के स्वयं सेवक कार्यरत हैं। संघ के साथ मिलकर जिन्होंने इस कार्य में सहयोग किया, हम सब आज उन सबका स्मरण करते हुए आभार व्यक्त करते हैं।
भारत के प्रत्येक व्यक्ति को सुरक्षा, सम्मान, प्रतिष्ठा मिलनी चाहिए। इसलिए संघ शताब्दी वर्ष से पंच परिवर्तन के विषय को ले कर आगे बढ़ेंगे।
देश हमे देता है सब कुछ हम भी तो कुछ देना सीखें।इस विचार को लेकर नौजवानों को खड़ा होना चाहिए।
देश में एक अध्यात्म, चरित्र, धर्म की क्रांति होनी चाहिए। जीवन सार्थक हो गया ऐसा विचार आना चाहिए। व्यक्ति निर्माण से चरित्र एवं राष्ट्र निर्माण करना ही संघ का उद्देश्य है।
कार्यक्रम के पश्चात पथ संचलन निकला जो राम कथा पार्क से तुलसी उद्यान होते हुए राम जन्मभूमि मंदिर के मुख्य द्वार के ठीक सामने बिड़ला मंदिर पर समाप्त हुआ। विशेष घोष के साथ पूर्ण गणवेश में कदम से कदम मिलाते हुए वेदवाक्य ‘संगच्छध्वं संवदध्वं सं वो मनांसि जानताम्’ का अनुसरण करते हुए स्वयंसेवकों ने अपने ‘स्व’ अनुशासन का परिचय देते हुए आम जनमानस को अपनी ओर आकृष्ट किया।
जगह जगह स्वयंसेवकों पर हो रही पुष्प वर्षा मानो हिंदू समाज संघ के प्रति अपनी कृतज्ञता व्यक्त करते हुए भारतीय संस्कृति और मूल्यों की रक्षा हेतु आशा भरी नजरों से देख रहा हो।
कार्यक्रम में प्रेम कुमार जी अखिल भारतीय जागरण पत्रिका प्रमुख, विश्व हिंदू परिषद के सरक्षक दिनेश जी, रामजन्म भूमि के महासचिव चंपत राय जी, विश्व हिंदू परिषद के गोपाल राव जी, ट्रस्टी डॉ अनिल मिश्रा जी, अनिल कुमार जी क्षेत्र प्रचारक, प्रांत प्रचारक कौशल जी, प्रांत प्रचार प्रमुख अशोक द्विवेदी, विभाग सह संघचालक मुकेश तोलानी जी, डॉ शैलेंद्र, महानगर प्रचारक सुदीप, महानगर संघचालक विक्रम प्रसाद पांडे जी , महानगर कार्यवाही देवेंद्र जी, राहुल जी उपस्थिति रहे।

