कानपुर कमिश्नरेट पुलिस ने कानपुर प्रेस क्लब के पूर्व अध्यक्ष अवनीश दीक्षित और तीन अन्य व्यक्तियों को संगठित अपराध में उनकी कथित संलिप्तता के लिए जिला बदर करने का आदेश जारी किया है। एक आधिकारिक बयान में यह जानकारी दी गई है।
जिला बदर करने का आदेश बुधवार को जारी किया गया। इसके तहत दीक्षित के छह महीने तक जिले में घुसने पर रोक है। बयान के अनुसार, पुलिस ने दीक्षित की पहचान एक संगठित गिरोह के मुखिया के रूप में की है।
बयान में कहा गया है कि दीक्षित के गिरोह में 26 सदस्य हैं और उस पर जमीन हड़पने, जबरन वसूली और हिंसा का आरोप है। पुलिस रिकॉर्ड के अनुसार, उसके खिलाफ 21 से अधिक आपराधिक मामले दर्ज हैं।
दीक्षित को पिछले साल 28 जुलाई को सिविल लाइंस इलाके में सरकारी जमीन पर अवैध रूप से कब्जा करने के प्रयास के आरोप में गिरफ्तार किया गया था। इस भूमि की कीमत 1,000 करोड़ रुपये से अधिक है।
इस साल दो जुलाई को इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने उसे ज़मानत दे दी थी और अगले ही दिन उसे कानपुर ज़िला जेल से रिहा कर दिया गया था।
अधिकारियों ने बताया कि जिला बदर करने का आदेश पुलिस द्वारा उसकी आपराधिक गतिविधियों पर अंकुश लगाने के लिए उठाया गया एक निवारक उपाय है।
दीक्षित और 15 अन्य के खिलाफ अदालत में 3,200 पन्नों का आरोपपत्र दाखिल किया गया है, जिसमें डकैती, आपराधिक षडयंत्र और गैरकानूनी रूप से एकत्र होने के आरोप शामिल हैं।
दीक्षित के अलावा तीन अन्य व्यक्तियों को भी जिला बदर किया गया है जिनमें वकील, शंकर उर्फ राइडर और आयुष गुप्ता शामिल हैं।


