अयोध्या, गणेश चतुर्थी हिन्दुओं का एक प्रमुख त्योहार है। गणेश का अर्थ होता है गणों का ईश और आदि का अर्थ होता है सबसे पुराना यानी सनातनी। इस बार यह त्योहार 27 अगस्त 2025 बुधवार के दिन रहेगा। 27 अगस्त को गणेश स्थापना और गणेश विसर्जन 6 सितम्बर 2025 शनिवार को होगा।
पुराणों के अनुसार इसी दिन भगवान श्री गणेश जी का जन्म हुआ था। मान्यता है कि गणेश जी का जन्म भाद्रपद शुक्ल पक्ष चतुर्थी को मध्याह्न काल में, सोमवार, स्वाति नक्षत्र एवं सिंह लग्न में हुआ था।
बाप्पा की मूर्ति लेते वक़्त इन बातों का रखें विशेष ध्यान..
गणेश जी की मूर्ति लेते समय सूंड़ बाईं ओर मुड़ी हुई (वामामुखी) हो, मूर्ति बैठी हुई मुद्रा में हो, उसमें चूहा (मूषक) और मोदक हों, और वह मध्यम आकार की हो। साथ ही, मूर्ति खरीदते समय आप सिंदूर या सफेद रंग की मूर्ति को शुभ मान सकते हैं और घर लाते समय उसे लाल कपड़े से ढककर लाएँ।
मूर्ति की सूंड़ बाईं ओर हो: वास्तु शास्त्र के अनुसार, गणेश जी की बाईं ओर मुड़ी हुई सूंड़ वाली (वामामुखी) मूर्ति घर में शांति और सुख-समृद्धि लाती है।
अतिसूक्ष्म घुमाव: मूर्ति में सूंड़ के दो घुमाव न हों।
मूर्ति की मुद्रा बैठी हुई मुद्रा: धन और बरकत के लिए बैठे हुए गणेश जी की मूर्ति लाना शुभ होता है, क्योंकि यह धन का प्रतिनिधित्व करती है।
मध्यम आकार: बहुत छोटी या बहुत बड़ी मूर्ति की जगह मध्यम आकार की मूर्ति लाना सबसे शुभ माना जाता है।
अन्य महत्वपूर्ण बातें
मूषक वाहन: मूर्ति में गणेश जी का वाहन मूषक (चूहा) जरूर हो।
मोदक हाथ में: गणेश जी के हाथ में मोदक (लड्डू) वाली मूर्ति शुभ मानी जाती है।
रंग: सिंदूर रंग की गणेश प्रतिमा आत्मविश्वास बढ़ाती है, जबकि सफेद रंग की प्रतिमा से घर में खुशहाली आती है।
आकार: बड़े आकार की मूर्तियां पंडालों के लिए होती हैं, घर के लिए मध्यम आकार की मूर्ति शुभ मानी जाती है।
ढककर लाएँ: घर लाते समय गणेश जी की मूर्ति का चेहरा लाल रंग के साफ कपड़े से ढककर रखें और स्थापित करने के बाद ही चेहरा खोलें।
बप्पा की मूर्ति की ऊंचाई
घर में गणेश चतुर्थी के लिए बप्पा की मूर्ति की ऊंचाई 1 से 12 अंगुल तक होनी चाहिए, जबकि पूजा स्थल या पंडाल के लिए 3 से 5 फीट की ऊंचाई वाली मूर्ति आदर्श मानी जाती है। घर के लिए छोटी मूर्ति रखने की सलाह दी जाती है, वहीं सार्वजनिक स्थानों पर बड़ी मूर्तियों की स्थापना की जाती है।
बप्पा की मुद्रा और भाव
गणपति बप्पा की मूर्ति की मुद्रा भी शुभता के लिए खास मायने रखती है। घर में विराजमान करने के लिए बैठे हुए गणपति सबसे शुभ माने जाते हैं। बैठे हुए बप्पा स्थिरता, शांति और स्थायी सुख का प्रतीक हैं। वहीं खड़े हुए गणपति अधिकतर सार्वजनिक पंडालों में स्थापित किए जाते हैं। इसके अलावा, मूर्ति के चेहरे पर मुस्कान और आंखों में कोमलता होनी चाहिए क्योंकि यह घर में सकारात्मक ऊर्जा का संचार करती है।
मूर्ति का रंग और सामग्री का चुनाव
आजकल बाजार में गणपति की मूर्तियां अलग-अलग रंगों और डिज़ाइनों में मिलती हैं। लेकिन शुभता के लिए प्राकृतिक और हल्के रंगों वाली मूर्ति चुनना बेहतर माना जाता है। सफेद, पीला और हल्का हरा रंग सकारात्मक ऊर्जा का संचार करते हैं। इसके अलावा, कोशिश करें कि मूर्ति की सामग्री मिट्टी (शाडू माटी) की हो। इससे न केवल धार्मिक महत्व बढ़ता है, बल्कि यह पर्यावरण को भी नुकसान नहीं पहुंचाती। प्लास्टर ऑफ पेरिस की मूर्तियों से बचना चाहिए क्योंकि वे पानी में घुलती नहीं और प्रदूषण फैलाती हैं।
मूर्ति खरीदते समय शुद्धता और भावना
गणेश जी की मूर्ति खरीदते समय मन और घर की शुद्धता का भी ध्यान रखना चाहिए। मूर्ति को दुकान से सीधे घर लाते समय उसमें कोई दिखावटी जल्दबाजी न करें। इसे पूरे आदर और श्रद्धा के साथ लाना चाहिए, मानो बप्पा खुद आपके घर पधार रहे हों। मूर्ति लाने से पहले घर की सफाई करें और उन्हें विराजमान करने के स्थान को सजाकर तैयार रखें।


