अयोध्या, मसौधा विकास खंड में बेसिक शिक्षा परिषद के अधीन संचालित परिषदीय विद्यालयों में तैनात प्रधानाध्यापकों द्वारा उतर प्रदेश बेसिक शिक्षा (अध्यापक ) सेवा नियमावली 1981 में वर्णित अध्यापकों की निर्धारित ज्येष्ठता को अपने विद्यालयों में मनमाने तरीके से लागू करने की परम्परा को अपनाया जा रहा है।
शासनादेश में परिषदीय विद्यालयों के अध्यापकों के पद को जिला स्तर संवर्ग का मानते हुए जनपद में ज्येष्ठता के निर्धारण हेतु जिले में नियुक्ति तिथि को आधार मान कर ज्येष्ठता निर्धारित किए जाने का स्पष्ट प्रावधान है, परंतु ज्येष्ठता संबंधी इस शासनादेश की मनमानी व्याख्या अपने स्तर से करके और निगरानी कर रहे अधिकारियों को चुनौती देते हुए ब्लॉक के कुछ प्रधानाध्यापकों ने जिले में नियुक्ति तिथि के स्थान पर विद्यालय में तैनाती से ज्येष्ठता का शासनादेश से इतर दोहरा निर्धारण करते हुए उपस्थिति पंजिका पर अंकन भी किया है।
बता दे, मसौधा शिक्षा क्षेत्र के अंतर्गत पूर्व माध्यमिक विद्यालय रानी बाज़ार (सरियावां) में भी ज्येष्ठता में अनियमितता करने का प्रकरण प्रकाश में आया है।
जहां प्रधानाध्यापिका द्वारा नियमों की अनदेखी करते हुए स्व निर्धारित, उसी दोहरी ज्येष्ठता से विद्यालय की उपस्थिति पंजिका में अंकन करते हुए विद्यालय में तैनात 2 वरिष्ठ शिक्षकों के स्थान पर कनिष्ठ शिक्षक को अपनी अनुपस्थिति में विगत कई वर्षों से दबाव बनाकर प्रधानाध्यापक का चार्ज नियमित रूप से देने की मनचाही परंपरा डालते हुए उनको शासन द्वारा आवंटित टैबलेट और सिम भी दिला दिया गया है।
ज्येष्ठता को अतिक्रमित करने वाले इस नियम विरुद्ध व्यवस्था का जब विद्यालय में तैनात कनिष्ठ शिक्षकों ने विरोध करते हुए आपत्ति की तो प्रधानाध्यापक ने उनसे इस संदर्भ में लिखित आदेश की मांग कर डाली।
इस बारे में प्रत्येक शिक्षक के हक की लड़ाई लड़ने का दम भरने वाले जूनियर शिक्षक संघ के पदाधिकारी भी सब कुछ जानते हुए भी विवश और मौन है।
उपरोक्त प्रकरण के बारे में मसौधा के खंड शिक्षा कार्यालय में विगत दिनों शिकायत करते हुए उचित मार्ग दर्शन की अपेक्षा भी की गई है, परंतु प्रकरण के निस्तारण में अब तक कोई प्रगति नहीं हो सकी है।


