हिंदू धर्म में हर महीने कई तरह के व्रत और त्योहार आते हैं और इन सब का अपना अलग महत्व होता है। ऐसे में आज 23 जून को सोम प्रदोष व्रत रखा जाएगा। यह दिन भगवान शिव को समर्पित है।
इस दिन भगवान शिव के साथ ही माता पार्वती की विधि-विधान से पूजा और व्रत का पालन करते हैं। इसके साथ ही इस व्रत के लाभ से अविवाहितों के विवाह के योग बनने के साथ मनपसंद जीवन साथी भी मिल सकता है।
ऐसा माना जाता है कि, इस दिन भगवान शिव और माता पार्वती की पूजा-अर्चना करने के अलावा कुछ मंत्रों का जाप करने से साधक को शुभ फल की प्राप्ति होती है। तो चलिए जानते हैं। वो कौन से मंत्र है।
शुभ मुहूर्त
आषाढ़ माह कृष्ण पक्ष की त्रयोदशी तिथि की शुरुआत 23 जून को देर रात 1 बजकर 21 मिनट पर होगा, जिसका समापन 23 जून को रात 10 बजकर 9 मिनट पर होगा। ऐसे में प्रदोष व्रत 23 जून को किया जाएगा।
पूजा विधि
व्रत वाले दिन सुबह जल्दी उठकर स्नान करने के बाद पूजा के लिए सबसे पहले मंदिर में चौकी को रखें। इस पर लाल रंग का साफ वस्त्र बिछा लें। अब इस पर भगवान शिव और मां पार्वती की मूर्ति को रखें। इसके बाद शिवलिंग पर शहद, घी और गंगाजल से अभिषेक करें और कनेर फूल, बेलपत्र और मिठाई का भोग लगाएं। शुद्ध देसी घी का दीप जलाएं और महाकाल के मंत्रों का जाप करके शिव जी की आरती करें और साथ ही शिव चालीसा का पाठ करें। पूजा पूरी होने के बाद महादेव को भोग लगाए और प्रसाद बांटे।
शिवजी के मंत्र:
ॐ नमः शिवाय
ॐ श्रां श्रीं श्रौं सः सोमाय नमः
ऊँ ऐं ह्रीं शिव-गौरीमय-ह्रीं ऐं ऊँ
ऊँ नमो धनदाय स्वाहा
शिव आरोग्य मंत्र
माम् भयात् सवतो रक्ष श्रियम् सर्वदा।
आरोग्य देही में देव देव, देव नमोस्तुते।।
ओम त्र्यम्बकं यजामहे सुगन्धिं पुष्टिवर्धनम्।
उर्वारुकमिव बन्धनान मृत्योर्मुक्षीय मामृतात्।।


