अयोध्या, विश्व हिन्दू परिषद के सयुंक्त महामंत्री कोटेश्वर शर्मा ने आज यहां कहा पंच कोसी, चौदह कोसी या फिर चौरासी कोसी परिक्रमा यह सभी भक्तो के उद्धार तथा भगवद् प्राप्ति का माध्यम है, वही सामाजिक समन्वय भी स्थापित करती है।
इस परम्परागत सांस्कृतिक विरासत को जीवंत रखना जन-जन का कर्तव्य है। अयोध्या के चौरासी कोस मे स्थापित है, अनेको धार्मिक एंव पौराणिक तीर्थ यह हमारी सांस्कृतिक विरासत को जीवित रखे हुये है। इनके दर्शन पूजन से भक्तो को अवलौकिक शक्ति प्राप्त होती है। इस परम्परागत परिक्रमा और तीर्थ का संरक्षण संवर्धन आवश्यक है।
हनुमान मंडल के संयोजन मे 13 अप्रैल रविवार मखौड़ा से 4 मई तक चलने वाली चौरासी कोसी परिक्रमा को रवाना करते हुए शनिवार को अपने विचार उपस्थित परिक्रमार्थियो के बीच प्रकट कर रहे थे। इससे पूर्व कारसेवक पुरम् मे श्रद्धालुओ के दर्शनार्थ रखे गये श्रीराम जन्मभूमि मंदिर माडल तथा हनुमान जी की महाआरती की गयी।
उन्होने कहा देवदर्शन बड़े ही कठिनाईयो से प्राप्त होता है।जप, तप, परिक्रमा आदि इसके माध्यम है। यहां आयोजित होने वाला पारम्परिक मेला उत्सव तथा परिक्रमा अयोध्या के धार्मिक स्वरूप को जीवंत प्रदान करते है।
कार्तिक माह मे पंचकोसी और चौदहकोसी परिक्रमा मे लाखो भक्त अयोध्या पहुंचकर इस पवित्र भूमि की परिक्रमा करके इसके रज को मस्तक पर ग्रहण करते हुये भगवान श्रीराम के प्रति अपनी श्रद्धानिवेदित करते है।
उन्होने कहा लेकिन अयोध्या चौदहकोस मे ही सीमित नही है इसकी धार्मिक और सांस्कृतिक सीमा तो चौरासी कोस मे है। जिसकी जानकारी बहुत कम लोगो को है।
उन्होने कहा अयोध्या की चौरासी कोस की परिक्रमा भी होती हैं ,यह जानकारी भी सीमित लोगो तक ही रही।विगत वर्ष 2013 मे विहिप और संतो ने इसका सम्पूर्ण देश मे प्रचार प्रसार किया।
कारसेवक पुरम् मे आयोजित महाआरती करने के उपरान्त परिक्रमा मणिराम दास जी की छावनी पहुंच कर परिक्रमार्थियो ने श्रीराम जन्मभूमि न्यास अध्यक्ष महंत नृत्य गोपाल दास महाराज का आशिर्वाद प्राप्त किया।
इस अवसर पर उन्होने कहा भगवद्च्चिन्तन और राष्ट्र समाज का उद्धार ही हम सभी भक्तो का संकल्प है।परिक्रमा ईश्वर प्राप्ति का साधन मात्र नही है यह लोककल्याण करने का महाअनुष्ठान है। चौरासी कोस की परिक्रमा से सामाजिक समरस्ता को व्यापक बल मिलता है। उन्होने विहिप के प्रयास को प्रशंसनीय बताते हुये कहा हनुमान मंडल के बैनर तले निकल रही यह परिक्रमा सामाजिक तथा धार्मिक वातावरण को विस्तार प्रदान करते हुये भविष्य मे व्यापक स्वरूप ग्रहण कर लेगी।
इस दौरान कारसेवकपुरम् के प्रभारी शिवदास सिंह, उमेश पोरवाल, शरद शर्मा, आदित्य उपाध्याय वीरेन्द्र कुमार, सुभाष भट्ट, पवन तिवारी आदि उपस्थित रहे।
इससे पूर्व परिक्रमा के प्रभारी सुरेन्द्र सिंह ने बताया यह परिक्रमा आज अयोध्या से मखोड़ा (मखभूमि) प्रस्थान करेगी रात्रि विश्राम के उपरांत प्रातःकाल दर्शन पूजन करके पूज्य संत आगे रजवापुर रामगढ़खास ,छावनी रामरेखा, देवकली हनुमान मंदिर विशेषरगंज हनुमानबाग बस्ती से सरयू पारकर फैजाबाद के शेरवाघाट श्रृंगीश्रृषि आश्रम महबूब गंज गोसाईगंज टिकरी तारून रामपुर भगन सूर्यकुंड दराब गंज हेमा सराय आस्तिकन अमानी गंज रौजागांव पटरंगा से बाराबंकी जनपद के बेलखरा मे प्रवेश करेगी
यंहा से गोंडा जनपद के देवीगंज दुलारेगंज जम्मूदीप ,भौरीगंज राजा पुर पस्का (संत तुलसीदास की जन्मभूमि) बखरिया,उमरी डिक्सिर अमदही जमदग्नि आश्रम तुलसीपुर नवाब गंज से जनपद बस्ती मे पुनः वापसी रेहली ,सिकंदरपुर होते हुये 3 मई को वापस मखोड़ा पहुंचेगी।
उन्होने बताया 4मई को अयोध्या धाम पहुंचकर सरयू स्नान करने के पश्चात राजकोट की परिक्रमा व सीता कुंड पर हवन पूजन करके परिक्रमा समाप्त होगी।


