केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) ने पांच मई को आयोजित मेडिकल प्रवेश परीक्षा ‘राष्ट्रीय पात्रता-सह-प्रवेश परीक्षा-स्नातक’ (नीट-यूजी) में कथित अनियमितताओं के सिलसिले में केंद्रीय शिक्षा मंत्रालय की ओर से जारी एक संदर्भ के आधार पर रविवार को एक प्राथमिकी दर्ज की।
पेपर लीक के दावों की जांच के लिए छात्रों द्वारा देशव्यापी विरोध प्रदर्शन और अदालतों में याचिकाएं दायर किये जाने के बीच यह कदम उठाया गया है।
अधिकारियों ने बताया कि मंत्रालय ने एजेंसी को दी गई एक शिकायत में आरोप लगाया है कि परीक्षा के दौरान कुछ राज्यों में ‘कुछ छिटपुट घटनाएं’ हुईं। शिकायत अब प्राथमिकी का हिस्सा है।
उन्होंने बताया कि मामले को सर्वोच्च प्राथमिकता देते हुए सीबीआई ने विशेष दल गठित किये हैं जो गोधरा और पटना रवाना हो गए हैं, जहां पुलिस ने प्रश्नपत्र लीक के मामले दर्ज किए हैं।
उन्होंने बताया कि एजेंसी गुजरात और बिहार में पुलिस द्वारा दर्ज किए गए इन मामलों की जांच अपने हाथ में लेने की योजना बना रही है। एक अधिकारी ने कहा, ‘‘राज्य पुलिस द्वारा दर्ज मामलों को भी एजेंसी के दायरे में लेने के लिए कदम उठाए जा रहे हैं।’’
सीबीआई ने यह कदम मंत्रालय द्वारा एजेंसी को परीक्षा में कथित अनियमितताओं की जांच सौंपने की घोषणा के एक दिन बाद उठाया गया है। यह मांग प्रदर्शन कर रहे छात्रों के एक वर्ग द्वारा की जा रही थी।
सीबीआई के एक प्रवक्ता ने कहा, ‘शिक्षा मंत्रालय ने सीबीआई से अभ्यर्थियों, संस्थानों और बिचौलियों द्वारा कथित अनियमितताओं के सम्पूर्ण पहलुओं की व्यापक जांच करने का अनुरोध किया है, जिसमें षड्यंत्र, धोखाधड़ी, अभ्यर्थी की जगह किसी और के परीक्षा में बैठने, विश्वासघात और साक्ष्यों को नष्ट करना शामिल है।’
अधिकारियों के अनुसार, परीक्षा के आयोजन से जुड़े लोक सेवकों की संभावित भूमिका और पूरे घटनाक्रम एवं बड़ी साजिश भी जांच के दायरे में होगी।
अधिकारियों ने बताया कि एजेंसी ने अज्ञात व्यक्तियों के खिलाफ भारतीय दंड संहिता की धारा 120-बी (आपराधिक साजिश) और 420 (धोखाधड़ी) के तहत एक नया मामला दर्ज किया है।
शिक्षा मंत्रालय के एक वरिष्ठ अधिकारी ने शनिवार को बताया, ‘पांच मई को आयोजित नीट-यूजी परीक्षा में कथित अनियमितताओं, धोखाधड़ी, अभ्यर्थी की जगह किसी और के परीक्षा में बैठने और कदाचार के कुछ मामले सामने आए हैं।’
अधिकारी ने कहा था, ‘एक समीक्षा के बाद यह निर्णय लिया गया कि परीक्षा प्रक्रिया के संचालन में पारदर्शिता के लिए मामले को व्यापक जांच के लिए केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) को सौंप दिया जाए।’
अनियमितताओं के आरोपों के बाद कई शहरों में विरोध प्रदर्शन शुरू हो गए और अभ्यर्थियों की ओर से अदालतों में याचिकाएं दायर की गईं और राजनीतिक वाद-विवाद शुरू हो गया, जिसमें विपक्ष ने सरकार पर छात्रों के भविष्य के साथ खिलवाड़ करने का आरोप लगाया।
सीबीआई और ईडी को नीट-यूजी में कथित अनियमितताओं की जांच के लिए निर्देश देने का अनुरोध करते हुए 10 अभ्यर्थियों ने उच्चतम न्यायालय का रुख किया है।
याचिका में बिहार पुलिस को मामले की जांच में तेजी लाने और शीर्ष अदालत के समक्ष रिपोर्ट दाखिल करने का निर्देश देने का भी अनुरोध किया गया है।
एक अलग मामले में, उच्चतम न्यायालय ने केंद्र, राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी (एनटीए) और अन्य से विभिन्न याचिकाओं पर जवाब मांगा, जिनमें नीट-यूजी 2024 परीक्षा रद्द करने और अदालत की निगरानी में जांच के अनुरोध वाली याचिकाएं शामिल हैं।
उच्चतम न्यायालय ने विभिन्न उच्च न्यायालयों में इसी तरह की याचिकाओं पर कार्यवाही पर भी रोक लगा दी।
यह परीक्षा राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी (एनटीए) द्वारा पांच मई को 571 शहरों में 4,750 केंद्रों पर आयोजित की गई थी, जिसमें 14 विदेशी शहर भी शामिल थे। तेईस लाख से अधिक अभ्यर्थियों ने परीक्षा दी थी।
यह परीक्षा देने वाले 67 छात्रों ने 720 अंक हासिल किए जो एनटीए के इतिहास में अभूतपूर्व हैं। इनमें हरियाणा के फरीदाबाद के एक केंद्र के छह छात्र भी शामिल हैं, जिससे अनियमितताओं का संदेह पैदा हो गया है।
छह केंद्रों पर समय की हानि की भरपाई के लिए छात्रों को दिए गए कृपांक को लेकर भी विवाद हुआ। बाद में केंद्र ने शीर्ष अदालत को बताया कि कृपांक रद्द किए जा रहे हैं और इन 1,563 छात्रों को फिर से परीक्षा देने का विकल्प दिया जाएगा।
देश भर के सरकारी और निजी संस्थानों में एमबीबीएस, बीडीएस, आयुष और अन्य संबंधित पाठ्यक्रमों में प्रवेश के लिए एनटीए द्वारा नीट-यूजी परीक्षा आयोजित की जाती है।
प्रतियोगी परीक्षाओं में कथित विसंगतियों को लेकर आलोचना का सामना कर रहे केंद्र ने शनिवार को एनटीए के महानिदेशक सुबोध सिंह को हटा दिया और एजेंसी के कामकाज की समीक्षा करने और परीक्षा सुधारों की सिफारिश करने के लिए भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) के पूर्व प्रमुख के. राधाकृष्णन की अध्यक्षता में सात सदस्यीय समिति गठित की। इसने नीट-पीजी (नीत-स्नातकोत्तर) प्रवेश परीक्षा स्थगित कर दी, जो हाल के दिनों में प्रभावित होने वाली चौथी प्रवेश परीक्षा है।


